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मदीना मदीना हमारा मदीना

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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मदीना मदीना हमारा मदीना हमें जान ओ दिल से है प्यारा मदीना सुहाना सुहाना दिल आरा मदीना दीवानों की आँखों का तारा मदीना ये हर आशिक़-ए-मुस्तफ़ा कह रहा है हमें तो है जन्नत से प्यारा मदीना ये रंगीं फ़ज़ाएं ये महकी हवाएं मुअत्तर मुअम्बर है सारा मदीना मदीने के जलवों के क़ुर्बान जाऊं ख़ुदा ने है कैसा संवारा मदीना पहाड़ों में भी हुस्न कांटे भी दिलकश बहारों ने कैसा निखारा मदीना वहां प्यारा काबा यहां सब्ज़ गुम्बद वो मक्का भी मीठा तो प्यारा मदीना बुला लीजिए अपने क़दमों में आक़ा दिखा दीजिए अब तो प्यारा मदीना फिरूं गर्द-ए-काबा पियूं आब-ए-ज़म ज़म मैं फिर आके देखूं तुम्हारा मदीना टली मुश्किलें हो गईं आफ़तें दूर गया जब कोई ग़म का मारा मदीना है शाह ओ गदा मुफ़लिस ओ अ़ग़निया का बिला रैब सब का गुज़ारा मदीना ये दीवाने आक़ा! मदीने को आएं बुलालो उन्हें अब ख़ुदारा मदीना ख़ुदा गर क़यामत में फ़र्माए मांगो पुकारेंगे दीवाने प्यारा मदीना मदीने में आक़ा! हमें मौत आए बने काश! म़दफ़न हमारा मदीना इसे सैर-ए-गुलशन से क्या सरोकार किया जिस ने तेरा नज़ारा मदीना ज़िया पीरोमुर्शिद के सदक़े में आक़ा अत्तार आएं दोबारा मदीना