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Mahboob-e-Rab-e-Akbar tashreef la rahe hain

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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महबूब-ए-रब-ए-अकबर तशरीफ़ ला रहे हैं आज अंबिया के सरवर तशरीफ़ ला रहे हैं क्यों है फ़ज़ा मुअत्तर! क्यों रोशनी है घर घर अच्छा! हबीब-ए-दावर तशरीफ़ ला रहे हैं ईद़ों की ईद आई रहमत ख़ुदा की लाई जूद-ओ-सख़ा के पैकर तशरीफ़ ला रहे हैं हूरें लगी हैं गुनगुनाने नअतों के तराने हूर-ओ-मलक के अफ़्सर तशरीफ़ ला रहे हैं आलम में हैं जो यकता, बे-मिस्ल हैं जो आक़ा वो आमिना के तेरे घर तशरीफ़ ला रहे हैं ऐ फ़र्शियो मुबारक! ऐ अर्शियो मुबारक! दोनों जहां के सरवर तशरीफ़ ला रहे हैं ऐ बे-कसो मुबारक! ऐ बे-बसो मुबारक! अब ग़मज़दों के यावर तशरीफ़ ला रहे हैं झूमो ऐ बद-नसीबो! हो जाओ ख़ुश ग़रीबो! देखो ग़रीब परवर तशरीफ़ ला रहे हैं कैसा है प्यारा मंज़र रंगीन-ओ-रूह परवर हर एक से हसीं तर तशरीफ़ ला रहे हैं रहमत बरस रही है हर सुम्त रोशनी है देखो मह-ए-मुनव्वर तशरीफ़ ला रहे हैं ऐ बे-नवाओ आओ, आओ गदाओ आओ वो आमिना के घर पर तशरीफ़ ला रहे हैं तेरी हलीमा दाई तक़दीर मुस्कुराई महबूब-ए-हक़ बरये घर तशरीफ़ ला रहे हैं उम्मत के नाज़ उठाने उम्मत को बख्शवाने अल्लाह के पैग़म्बर तशरीफ़ ला रहे हैं आज अज़पये विलादत जी हाँ मिलेगी जन्नत मुख़्तार-ए-खुल्द-ओ-कौसर तशरीफ़ ला रहे हैं ख़ुद चल के मंज़िल आए आकर गले लगाये भटके हुओं के रहबर तशरीफ़ ला रहे हैं वक़्त-ए-विलादत आया है शोर मरहबा का दोनों जहाँ के सरवर तशरीफ़ ला रहे हैं शैतान की आयी शामत क्यों दूर हो न ज़ुल्मत हाँ हाँ अरब के ख़ावर तशरीफ़ ला रहे हैं कसरा का क़स्र-ए-हक़ है शैतान का रंग फ़िक़ है देखो! रसूल-ए-अनवर तशरीफ़ ला रहे हैं तअज़ीम के लिये अब ऐ मोमिनो उठो सब आराम-ए-जान-ए-मुज़्तर तशरीफ़ ला रहे हैं अपना ग़ुलाम कहने इस उजड़े दिल में रहने कब ऐ ग़रीब परवर तशरीफ़ ला रहे हैं उफ़! हाये घुप्प अंधेरा चमकाने गोर-ए-तीरा कब ऐ मह-ए-मुनव्वर तशरीफ़ ला रहे हैं ऐ तिशनगान-ए-महशर देखो करम के पैकर कौसर का ले के साग़र तशरीफ़ ला रहे हैं बदकारो! रखो हिम्मत फ़रमायेंगे शफ़ाअत देखो शफ़ी-ए-महशर तशरीफ़ ला रहे हैं अत्तार अब ख़ुशी से फूला नहीं समाता दुनिया में इस के सरवर तशरीफ़ ला रहे हैं