मैं बन जाऊंगा दीवाना मैं हो जाऊंगा मस्ताना
अता हो इश्क़ का इक ज़र्रा या रसूल अल्लाह
तुम्हारी याद में रोया करूँ तड़पा करूँ कर दो
इनायत अपने ग़म का ज़ख़्म गहरा या रसूल अल्लाह
रुलाए तेरा ग़म दुनिया के ग़म में मेरे आँसू का
ना हो बर्बाद आक़ा कोई क़तरा या रसूल अल्लाह
बुला लो गुम्बद-ए-ख़ज़रा की ठंडी छांव में
मदीने का दिखा दो मुझ को सहरा या रसूल अल्लाह
सआदत कर्बला की हाज़िरी की भी इनायत हो
दिखा दीजे मुझे बग़दाद-ओ-बसरा या रसूल अल्लाह
निकलने वाली है अब रूह-ए-मुज़्तर जिस्म से जाना
करम! ईमान को है शैतान से ख़तरा या रसूल अल्लाह
हुई जाती है हाय उम्र ज़ाए हो रही है
नहीं आएगा हरगिज़ वक़्त गुज़रा या रसूल अल्लाह
करम! अत्तार बद-अत्वार के गुलज़ार पर आक़ा
लगाया है ख़िज़ां ने सख़्त पहरा या रसूल अल्लाह