मैं मक्के में फिर आ गया या इलाही करम का तेरे शुक्रिया या इलाही
न कर रद कोई इल्तिजा या इलाही हो मक़बूल हर एक दुआ या इलाही
रहे ज़िक्र आठों पहर मेरे लब पर तेरा या इलाही तेरा या इलाही
मरी ज़िंदगी बस तेरी बंदगी में ही ऐ काश गुज़रे सदा या इलाही
न हों अश्क बर्बाद दुनिया के ग़म में मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व आलेही वसल्लम) के ग़म में रुला या इलाही
अता कर दे इख़लास की मुझे नेअमत न नज़दीक आए रिया या इलाही
मुझे औलिया की मोहब्बत अता कर तू दीवाना कर ग़ौस का या इलाही
मैं याद-ए-नबी में रहूं गुम हमेशा मुझे उन के ग़म में घुला या इलाही
मरे बाल बच्चों पे सारे क़बीले पे रहमत हो तेरी सदा या इलाही
दे अत्तार यूं बल्कि सब सुन्नियों को मदीने का ग़म या ख़ुदा या इलाही
ख़ुदाया अजल आ के सर पर खड़ी है दिखा जलवा-ए-मुस्तफ़ा या इलाही
मरी लाश से सांप बिच्छू न लिपटें करम अज़ तुफ़ैल-ए-रज़ा या इलाही
तू अत्तार को सब्ज़ गुम्बद के साए में कर दे शहादत अता या इलाही