मैं सरापा हूँ ग़म, ताजदार-ए-हरम
Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri
मैं सरापा हूँ ग़म, ताजदार-ए-हरम
कीजिए रहम-ओ-करम, ताजदार-ए-हरम
उजड़ा उजड़ा समां, छा गई है ख़िज़ां
बरसे अब्र-ए-करम, ताजदार-ए-हरम
ऐ शह-ए-बहर-ओ-बर, आह! कमज़ोर पर
टूटा कोह-ए-अलम, ताजदार-ए-हरम
सदक़ा हसनैन का, मुझ से बे-चैन का
दूर हो रंज-ओ-ग़म, ताजदार-ए-हरम
बिगड़ी क़िस्मत संवर, जाए गी हो नज़र
सूए लोह-ओ-क़लम, ताजदार-ए-हरम
अब बुला लो वहीं, दूर रह कर कहीं
टूट जाए ना दम, ताजदार-ए-हरम
शाह-ए-जिन-ओ-बशर, ख़ैर से मेरे घर
तेरे आएँ क़दम, ताजदार-ए-हरम
दूर हों आफ़तें, दीजिए राहतें
हो निगाह-ए-करम, ताजदार-ए-हरम
अज़ पए चार यार, अब तो बेड़ा हो पार
हो निगाह-ए-करम, ताजदार-ए-हरम
ऐ मेरे चारा-गर, अपने बीमार पर
हो निगाह-ए-करम, ताजदार-ए-हरम
दो नक़ाब उलट, आएँ जलवे सिमट
हो निगाह-ए-करम, ताजदार-ए-हरम
मुझ को दीद-ए-बक़ी, अब तो दीद-ए-बक़ी
हो निगाह-ए-करम, ताजदार-ए-हरम
आप हाज़िर भी हैं, आप नाज़िर भी हैं
हाँ ख़ुदा की क़सम, ताजदार-ए-हरम
सरवर-ए-दो जहान, आप हैं ग़ैब दां
किब्रिया की क़सम, ताजदार-ए-हरम
अपने अत्तार को, माल-ओ-दौलत ना दो
देख बस अपना ग़म, ताजदार-ए-हरम