मरहबा आज चलेंगे शह-ए-अबरार के पास
(अल्हम्दुलिल्लाह अज़्ज़वजल 1422हि ता 1423हि के सफ़र-ए-मदीना में हरमैन तय्यबैन में ये कलाम क़लमबंद किया)
मरहबा आज चलेंगे शह-ए-अबरार के पास
इंशा अल्लाह पहुंच जाएंगे सरकार के पास
पेश करने के लिए कुछ नहीं बदकार के पास
ढेरों इसयां हैं गुनाहगारों के सरदार के पास
मिल चुका इज़न-ए-मुबारक हो मदीने का सफ़र
क़ाफ़िले वालो चलो चलते हैं सरकार के पास
ख़ूब रो रो के वहां ग़म का फ़साना कहना
ग़मज़दा आओ चलो अहमद-ए-मुख़्तार के पास
मैं गुनाहगार गुनाहों के सिवा क्या लाता
नेकियां होती हैं सरकार-ए-नकोकार के पास
सर भी ख़म आंख भी नम, शर्म से पानी पानी
क्या करे नज़्र नहीं कुछ भी गुनाहगार के पास
आंख जब गुम्बद-ए-ख़ज़रा का नज़ारा कर ले
दम निकल जाए मेरा आप की दीवार के पास
अर्सा-ए-हश्र में जब रोता बिलकता देखा
रहम खाते हुए दौड़ आए वो बदकार के पास
मुजरिमो! इतना भी घबराओ न महशर में तुम
मिल के चलते हैं सभी अपने मददगार के पास
दोनों आलम की भलाई का सवाली बन कर
एक भिखारी है खड़ा आप के दरबार के पास
शाह वाला ये मदीने का बने दीवाना
एक भिखारी है खड़ा आप के दरबार के पास
अपना ग़म चश्म-ए-नम और रिक्क़त-ए-क़ल्बी दीजे
एक भिखारी है खड़ा आप के दरबार के पास
उल्फत-ए-नाब ले मिले और दिल-ए-बेताब मिले
एक भिखारी है खड़ा आप के दरबार के पास
हुस्न-ए-अख़लाक़ मिले भीक में इख़लास मिले
एक भिखारी है खड़ा आप के दरबार के पास
अज़ पये ग़ौस-ओ-रज़ा कुफ़्ल-ए-मदीना मिल जाए
एक भिखारी है खड़ा आप के दरबार के पास
इस्तक़ामत इसे ईमां पे अता कर दीजे
एक भिखारी है खड़ा आप के दरबार के पास
है मदीने में शहादत का ये मंगता मौला
एक भिखारी है खड़ा आप के दरबार के पास
क़ब्र-ओ-महशर में अमां का है तलबगार हुज़ूर!
एक भिखारी है खड़ा आप के दरबार के पास
नार-ए-दोज़ख से रिहाई का मिले परवाना
एक भिखारी है खड़ा आप के दरबार के पास
इस को जन्नत में जवार अपना अता हो दाता
एक भिखारी है खड़ा आप के दरबार के पास
आप से आप ही का है ये सवाली आक़ा
एक भिखारी है खड़ा आप के दरबार के पास
क़ब्र में यूं ही नकीरो! नहीं आया वल्लाह
है गुलामी की सनद देख लो अत्तार के पास