ख़ल्क़ पे लुत्फ़-ए-ख़ुदा हज़रत-ए-उस्मान हैं
जुमला मरज़ की दवा दर्द के दरमान हैं
दस्त-ए-शाह जो के यद-उल्लाह था
हाथ बना आप का आप वो ज़ी-शान हैं
नूर-ए-दिल ओ ऐन हैं साहिब-ए-नूरैन हैं
सब के दिल के चैन हैं मोमिनों की जान हैं
गुलशन-ए-दीन की बहार मोमिनों के ताजदार
इज़्ज़त-ए-हर ज़ी-वकार ज़ीनत-ए-ईमान हैं
आप मम्दूहे-जहाँ ख़ल्क़-ए-ख़ुदा मदह ख़्वाँ
क्या है अगर बदगुमाँ चंद बे-ईमान हैं
हक़ ने वो रुतबा दिया तुम ग़नी हम सब गदा
क्या कहूँ मैं तुम हो क्या अक़्ल ओ दिल हैरान हैं
जो हैं इमाम-ए-अनाम जिस के हैं हम सब ग़ुलाम
मरजअ-ए-हर ख़ास ओ आम हज़रत-ए-उस्मान हैं