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Maroozah ba-bargah Ameer-ul-Momineen Umar ibn Khattab Radi Allahu Anhu

Written by Mufti Ahmad Yar Khan Naeemi

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बहार-ए-बाग़-ए-ईमां हज़रत-ए-फारूक-ए-आज़म हैं चिराग-ए-बज़्म-ए-इरफ़ान हज़रत-ए-फारूक-ए-आज़म हैं नुमायाँ आप की हर एक अदा से शान-ए-फारूक़ी खुदा की तेग-ए-बुर्रां हज़रत-ए-फारूक-ए-आज़म हैं अशिद्दा-उ-अलल-कुफ़्फ़ारी के मिस्दाक़-ए-आ’ला हैं मुज़िल्लु कुफ़्र-ओ-तुगयां हज़रत-ए-फारूक-ए-आज़म हैं रसूल-ए-अल्लाह ने फारूक को अल्लाह से मांगा अता-ए-रब्ब-ए-सुभान हज़रत-ए-फारूक-ए-आज़म हैं फंसा उस पाक ने दीन के लिए उस पाक थरे को हबीब-ए-दीन-ए-दारां हज़रत-ए-फारूक-ए-आज़म हैं हबीब-ए-हक़ हैं तय्यब उन के सब साथी भी ताहिर हैं चुनीदा बहर-ए-पाकां हज़रत-ए-फारूक-ए-आज़म हैं न क्यों वो ज़ात चमके जिस ने दीन पाक चमकाया जहां के मेहर-ए-ताबान हज़रत-ए-फारूक-ए-आज़म हैं उमर हैं दीन के हक़ तआला उन का नासिर है दिल-ए-मोमिन के ताबान हज़रत-ए-फारूक-ए-आज़म हैं रहेगा नाम उन का ता अबद कौनैन में रोशन सिपेहर-ए-दीन पे रख़्शां हज़रत-ए-फारूक-ए-आज़म हैं उमर काफी नबी को हस्बुकल्लाह से ये साबित है है शाहिद जिन पे क़ुरआन हज़रत-ए-फारूक-ए-आज़म हैं वो आलम दब्दबा का कांपते हैं क़ैसर-ओ-किसरा है जिन से दीन की शां हज़रत-ए-फारूक-ए-आज़म हैं खज़ाने रूम-ओ-फ़ारस के लुटाते हैं मदीना में फुयूज़-ए-हक़ के बारां हज़रत-ए-फारूक-ए-आज़म हैं मगर उस हाल में धो धो कर इक कुर्ता पहनते हैं है तक़वा जिन पे नाज़ाँ हज़रत-ए-फ़ारूक़-ए-आज़म हैं मुसलमाँ रात भर सोएँ उमर फ़ारूक़ पहरा दें रिआया के निगहबाँ हज़रत-ए-फ़ारूक़-ए-आज़म हैं पुकारा सारिया को इक महीना की मसाफ़त से जिसे हर जा हो यकसाँ हज़रत-ए-फ़ारूक़-ए-आज़म हैं हैं दामाद-ए-अली ओ नाज़नीन-ए-हज़रत-ए-ज़हरा है सालिक जिन पे नाज़ाँ हज़रत-ए-फ़ारूक़-ए-आज़म हैं