Home/Muhammad Ilyas Attar Qadri/Masnavi-e-Attar (3)

Masnavi-e-Attar (3)

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

100%
हो गया तुझ से ख़ुदा नाराज़ अगर क़ब्र सुन ले आग से जाएंगी भर उम्र में छोटी है गर कोई नमाज़ जल्द अदा कर ले तू ग़फ़लत से बाज़ ऐ जवारी तू जुए से बाज़ आ वरना फंस जाएगा जिस दिन तू मरा ऐ मिलावट करने वाले मान जा ख़ौफ़ कर भाई अज़ाब-ए-नार का छोड़ दो ऐ ताजरो! कम तोलना झूट छोड़ो बेचने में बोलना भाइयों का दिल दुखाना छोड़ दो और तमसख़र भी उड़ाना छोड़ दो सूद-ओ-रिश्वत में नजासत है बड़ी नीज़ दोज़ख़ में सज़ा होगी कड़ी दिल दुखाना छोड़ दें माँ बाप का वरना है इस में ख़सारा आप का बदगुमानी, झूट, ग़ीबत, चुगलियां छोड़ दे तू रब्ब की नाफ़रमानियां मत निकालो गंदी गालियां ये गुनाह का काम है सुन लो मियां तू नशे से बाज़ आ मत पी शराब दो जहान हो जाएंगे वरना ख़राब फ़िल्म में की आँख में महशर में आग आह! भर जाएंगी तू फ़िल्मों से भाग बैंड बाजों से तू कोसों दूर भाग वरना दोज़ख़ की तुझे खाएगी आग मत बजाओ भाइयों! तुम तालियां इस तरह की छोड़ दो नादानियां ऐ मेरी बहनों! सदा पर्दा करो तुम गली कूचों में मत फिरती रहो अपने देवर जेठ से पर्दा करो इन से हरगिज़ बे-तकल्लुफ़ मत बनो वरना सुन लो क़ब्र में जब जाओगी सांप बिच्छू देख कर चिल्लाओगी ऐ बहन अपने मियां को मत सता जब मरेगी पाएगी इस की सज़ा भाई हक़ मत मारना घर बार का वरना होगा मुस्तहक़ तू नार का या इलाही! नेक कर अत्तार को बख़्श दे तू बख़्श दे बदकार को