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Meray Mushtaq Ko Koi Dawa Do Ya RasoolAllah

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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मरे मुश्ताक़ को कोई दवा दो या रसूलल्लाह (दावत-ए-इस्लामी की मरकज़ी मजलिस-ए-शूरा के मरहूम निगरां हाजी मुश्ताक़ अत्तारी अलैहि रहमतुलबारी की सख़्त अलात के अय्याम में बारगाह-ए-रिसालत सल्लल्लाहु तआला अलैहि वा आलिही वसल्लम में ये इस्तिगासा पेश किया गया) मरे मुश्ताक़ को कोई दवा दो या रसूलल्लाह दवा कर शफ़ा-ए-कामिला दुआ दो या रसूलल्लाह तबीबों ने मरीज़-ए-लादावा कह कह के टाला है बना नाकाम उन का अंदिया दो या रसूलल्लाह मरा मुश्ताक़ मौला कब तड़पे गा बेचारा दुआ भी दो दवा भी दो शफ़ा दो या रसूलल्लाह मरे मुश्ताक़ के उजड़े चमन में फिर बहार आए कली पुर-मुर्दा दिल की तुम खिला दो या रसूलल्लाह मरे मुश्ताक़-ए-रंजीदा पे हो चश्म-ए-करम आक़ा बेचारे ग़म के मारे को हंसा दो या रसूलल्लाह करम से अब सर-ए-बालीं शहा तशरीफ़ ले आओ उसे दीदार का शरबत पिला दो या रसूल अल्लाह शिफ़ा पा कर ये नेमतें पढ़ के फिर तड़पने लग जाए लु'आब-ए-अपना उसे आ कर पिला दो या रसूल अल्लाह शहा मुश्ताक़ कब तक दर-ब-दर की ठोकरें खाए कहाँ जाए बेचारा तुम बता दो या रसूल अल्लाह करम कर दो तरस खाओ दुखी दिल की सदा सुन लो बला मुश्ताक़ से हर एक हटा दो या रसूल अल्लाह सुनो या मत सुनो ये रट लगाए जाएंगे हम तो शिफ़ा दो यार-ए-रसूल अल्लाह शिफ़ा दो या रसूल अल्लाह फ़क़त अमराज़-ए-जिस्मानी की ही करता नहीं फ़रियाद गुनाहों के मरज़ से भी शिफ़ा दो या रसूल अल्लाह ये फिर नेकी की दावत के लिए दौड़े जहाँ भर में मेरे मुश्ताक़ को ऐसा बना दो या रसूल अल्लाह शहा मुश्ताक़ को हज्ज की सआदत फिर अता कर दो बुला कर सब्ज़ गुम्बद भी दिखा दो या रसूल अल्लाह