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Mubarak ho Habib-e-Rabb-e-Akbar aane wale hain

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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जो है गुस्ताखे-मुस्तफा उस को, मैं ने दिल से निकाल रखा है किस क़दर बख्तवर है वो मोमिन, जिस के पास उन का बाल रखा है मुफ़लिसी का मैं क्यों करूँ शिकवा, नेअमतों से निहाल रखा है माल की हिर्स मत करो इस में, दो जहाँ का वबाल रखा है यह करम ही तो उन का है अत्तार, तुझ निकम्मे को पाल रखा है मुबारक हो हबीबे रब्बे अकबर आने वाले हैं मुबारक! अंबिया का आज अफ़सर आने वाले हैं अंधेरों में भटकते फिरने वालों को मुबारक हो तुम्हें हक़ से मिलाने आज रहबर आने वाले हैं मुबारक बदनसीबों को मुबारक हो गरीबों को जहाँ में बे-बसों का साया-गस्तर आने वाले हैं गुनहगारो ना घबराओ ना करो ग़म खाओ सुनो मुज़दा! शफ़ीए-रोज़े-महशर आने वाले हैं लिए परचम उतर आए हैं जिब्रील आसमाँ से आज जहाँ में आज मौला का पयम्बर आने वाले हैं करो घर घर चरागाँ सब्ज़ परचम आज लहराओ मचाओ मरहबा की धूम सरवर आने वाले हैं अगर ना आज झूमू गे तो कब झूमू गे दीवानो! मचल जाओ तुम्हारा आज यावर आने वाले हैं तरावत क्यों ना हासिल हो मेरे क़ल्बो-जिगर को आज जहाँ में बहरे-रहमत का शनावर आने वाले हैं दिले-ग़मगीं को मिल जाए गा सामाने-राहत का सुरूर-ए-दिल, क़रारे-जाने-मुज़्तर आने वाले हैं जो है सरदार, आलम के सभी सजदा गुज़ारों का ख़ुदा का आज वो सच्चा सनागर आने वाले हैं मुबारक ग़म के मारो! ग़म ग़लत हो जाएँ गे सारे हबीबे-हक़ मुदावाए-ग़म आ ले कर आने वाले हैं जहाँ में ज़ुल्मतों का चाक होगा आज से सीना ख़ुदा के फ़ज़्ल से माहे-मुनव्वर आने वाले हैं बिहमदिल्लाह ईमान अब तू मेरा ले नहीं सकता अरे चल भाग शैतान मेरा यावर आने वाला है ख़बर है अबर-ए-रहमत आज क्यों दुनिया पे छाए हैं जहाँ में रहमतों का आज पैकर आने वाला है मुबारक हो हलीमा सा'दिया तुझ को मुबारक हो तेरी गोदी में कुल आलम का सरवर आने वाला है उठो ता'ज़ीम की ख़ातिर कि घर में आमिना के अब विलादत का वो लम्हा कैफ़-आवर आने वाला है उठाओ सब्ज़ परचम और चलो सब आमिना के घर लुटाने रहमतें हक़ का पैग़म्बर आने वाला है तसल्ली तो रखो सैराब भी हो जाओगे अत्तार छलकता जाम ले कर शाह-ए-कौसर आने वाला है