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मुझ को पहुँचा दे ख़ुदा अहमद-ए-मुख़्तार के पास

Written by Maulana Muhammad Jamil-ur-Rehman Razvi

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मुझ को पहुँचा दे ख़ुदा अहमद-ए-मुख़्तार के पास हाल-ए-दिल अर्ज़ करूँ सय्यद-ए-अबरार के पास जिस को देखो वो इसी दर पे चला आता है भीड़ है शाह-ओ-गदा की दर-ए-सरकार के पास बे-तलब जिस को जो चाहें वो अता करते हैं सब ख़ज़ाने हैं मेरे मालिक-ओ-मुख़्तार के पास दौलत-ओ-फ़ज़्ल-ओ-करम ने'मत-ओ-जाह-ओ-इक़बाल कौनसी चीज़ नहीं है मेरे सरकार के पास बादशाहान-ए-जहाँ दस्त-ए-नगर हैं उन के हाथ फैलाए खड़े रहते हैं दरबार के पास