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Mujhe Madine ki do ijazat, Nabi Rehmat Shafi-e-Ummat

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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मुझे मदीने की दो इजाज़त, नबी रहमत शफ़ी-ए-उम्मत पिलाओ बुलवा के जाम-ए-उल्फ़त, नबी रहमत शफ़ी-ए-उम्मत अगर नहीं मेरी ऐसी क़िस्मत, सदा हुज़ूरी की पाऊँ लज़्ज़त रुलाए मुझ को तुम्हारी फ़ुरक़त, नबी रहमत शफ़ी-ए-उम्मत अता हो मुझ को ग़म-ए-मदीना, तपाँ जिगर चाक चाक सीना बढ़े मोहब्बत की ख़ूब शिद्दत, नबी रहमत शफ़ी-ए-उम्मत लगाओ सीने में आग ऐसी, क़रार पाए न दिल कभी भी रुलाए हर दम तुम्हारी उल्फ़त, नबी रहमत शफ़ी-ए-उम्मत मैं नाम पर तेरे वारी जाऊँ, मैं इश्क़ में तेरे घर लुटाऊँ मिले वो जज़्बा मिले वो हिम्मत, नबी रहमत शफ़ी-ए-उम्मत हुसैन इब्न-ए-अली का सदक़ा, हमारे ग़ौस-ए-जली का सदक़ा अता मदीने में हो शहादत, नबी रहमत शफ़ी-ए-उम्मत हर इक नबी हर वली का सदक़ा, तुझे तेरी हर गली का सदक़ा दे तैबा में मरने की सआदत, नबी रहमत शफ़ी-ए-उम्मत इमाम अहमद रज़ा का सदक़ा, हमारे मुर्शिद ज़िया का सदक़ा बक़ी-ए-ग़रक़द करो इनायत, नबी-ए-रहमत शफ़ी-ए-उम्मत वसीला ख़ुल्फ़ा-ए-राशिदीन का, तमाम असहाब-ओ-ताबिईन का जवार-ए-जन्नत में हो इनायत, नबी-ए-रहमत शफ़ी-ए-उम्मत मुझे तुम ऐसी दो हिम्मत आक़ा, दूँ सब को नेकी की दावत आक़ा बनादो मुझ को भी नेक ख़सलत, नबी-ए-रहमत शफ़ी-ए-उम्मत क़लील रोज़ी पे दो क़नाअत, फ़ुज़ूल गोई से देदो नफ़रत दुरुद पढ़ता रहूँ बकसरत, नबी-ए-रहमत शफ़ी-ए-उम्मत गुनाह के दलदल से अब निकालो, मुझे संभालो मुझे बचा लो कहीं न हो जाऊँ तबाह-ओ-ग़ारत, नबी-ए-रहमत शफ़ी-ए-उम्मत बनादो सब्र-ओ-रज़ा का पैकर, बनूँ ख़ुश-अख़लाक़ ऐसा सरवर रहे सदा नर्म ही तबीयत, नबी-ए-रहमत शफ़ी-ए-उम्मत न हो अता इस को माल-ओ-दौलत, न दीजे अत्तार को हुकूमत ये तेरा तालिब है जान-ए-रहमत, नबी-ए-रहमत शफ़ी-ए-उम्मत