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Na ho mayoos deewano jao tum un ko

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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ना हो मायूस दीवानो जाओ तुम उन को बुलाएंगे तुम्हें भी एक दिन सरवरे मदीने में बुला लो हम गरीबों को बुला लो या रसूल अल्लाह पए शब्बीर ओ शब्बर फ़ातिमा हैदर मदीने में ख़ुदाया वास्ता देता हूं मेरे गौसे आज़म का दिखा दे सब्ज़ गुम्बद का हसीं मंज़र मदीने में वसीला तुझ को अबु बक्र ओ उमर, उस्मान ओ हैदर का इलाही तू अता कर दे हमें भी घर मदीने में मदीने जब मैं पहुंचूं काश ऐसा कैफ़ तारी हो कि रोते रोते गिर जाऊं मैं गश खा कर मदीने में नक़ाब रुख उलट जाए तेरा जल्वा नज़र आए जब आए काश! तेरा साइल बे पर मदीने में जो तेरी दीद हो जाए तो मेरी ईद हो जाए ग़म अपना दे मुझे ईदी में बुलवा कर मदीने में मदीने जूं ही पहुंचा अश्क जारी हो गए मेरे दमे रुखसत भी रोया हिचकियां भर कर मदीने में मदीने की जुदाई आशिकों पर शाक़ होती है वो रोते हैं तड़प कर हिचकियां भर कर मदीने में कहीं भी सोज़ है दुनिया के गुलज़ारों में बागों में? फ़ज़ा पुरकैफ़ है लो देख लो आ कर मदीने में वहां इक सांस मिल जाए यही है ज़ीस्त का हासिल वो क़िस्मत का धनी है जो गया दम भर मदीने में मदीना जन्नतुल फ़िरदौस से भी औला ओ आला रसूले पाक का है रौज़ए अनवर मदीने में चलो चौखट पे उन की रख के सर क़ुर्बान हो जाएं हयाते जावदानी पाएंगे मरकज़ मदीने में मदीना मेरा सीना हो मेरा सीना मदीना हो मदीना दिल के अंदर हो दिले मुज़्तर मदीने में मुझे नेकी की दावत के लिए रखो जहाँ भी काश! मैं ख़्वाबों में पहुँचता ही रहूँ अक्सर मदीने में न दौलत दे न सर्वत दे मुझे बस ये सआदत दे तेरे क़दमों में मर जाऊँ मैं रो रो कर मदीने में अता कर दो अता कर दो बक़ी-ए-पाक में मदफ़न मेरी बन जाए तुर्बत या शह-ए-कौसर मदीने में मदीना इस लिए अत्तार जान-ओ-दिल से है प्यारा के रहते हैं मेरे आक़ा मेरे सरवर मदीने में