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नाम लेवा तेरा कूचा से तेरे शाद आया

Written by Maulana Muhammad Jamil-ur-Rehman Razvi

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नाम लेवा तेरा कूचा से तेरे शाद आया कब तेरे दर से कोई लूट के बे-दाद आया ले गया दिल की मुरादों से वो भर कर दामन जो तेरे रौज़ा पे करता हुआ फ़रियाद आया तेरे रौज़े को न क्यों क़िबला-ए-हाजात कहूँ लूट कर शाद गया जो कोई ना-शाद आया नाम ने तेरे हर इक ग़म से बचाया हम को रंज सब भूल गए तो हमें जब याद आया जब ग़ुलामों ने मुसीबत में तुझे याद किया आन की आन में तू बरसर-ए-इमदाद आया तुझ पे क़ुर्बान मैं ऐ आईना-ए-ज़ात-ए-ख़ुदा इक नज़र देख लिया तुझ को ख़ुदा याद आया कब वो दिन होगा कि ये अहबाब कहें ऐ जमील-ए-रिज़वी देख तो बगदाद आया