ऐ करीम इब्न-ए-करीम ऐ रहनुमा ऐ मुकतदा
अख्तर-ए-बुर्ज-ए-सखावत गौहर-ए-दुरज-ए-अता
आस्ताने पर तेरे हाज़िर है ये तेरा गदा
लाज रख ले दस्त ओ दामन की मेरे बहर-ए-खुदा
रूए रहमत बर मताब ऐ काम-ए-जाँ अज़ रूए मन
हुर्मत-ए-रूह-ए-पयम्बर यक नज़र कुन सूए मन
शाह-ए-अकलीम-ए-विलायत सरवर-ए-गीवाँ जनाब
है तुम्हारे आस्ताने की ज़मीन गर्दूँ क़िबाब
हसरत-ए-दिल की कशाकश से हैं लाखों इज़्तिराब
इल्तिजा मकबूल कीजे अपने सायल की शताब
रूए रहमत बर मताब ऐ काम-ए-जाँ अज़ रूए मन
हुर्मत-ए-रूह-ए-पयम्बर यक नज़र कुन सूए मन
सालिक-ए-राह-ए-ख़ुदा को रहनुमा है तेरी ज़ात
मसलक-ए-इरफ़ान-ए-हक़ में पेशवा है तेरी ज़ात
बे-नवायान्-ए-जहाँ का आसरा है तेरी ज़ात
तिश्ना कामों के लिए बहर-ए-अता है तेरी ज़ात
रूए रहमत बर-मताब ऐ महे जाँ अज़ रूए मन
हुरमत-ए-रूह-ए-पैग़म्बर यक नज़र कुन सूए मन
हर तरफ़ से फ़ौज-ए-ग़म की है चढ़ाई अल-ग़ियास
करती है पामाल ये बे-दस्त-ओ-पाई अल-ग़ियास
फिर गई है शक्ल-ए-क़िस्मत सब ख़ुदाई अल-ग़ियास
ऐ मेरे फ़रियाद-रस तेरी दुहाई अल-ग़ियास
रूए रहमत बर-मताब ऐ महे जाँ अज़ रूए मन
हुरमत-ए-रूह-ए-पैग़म्बर यक नज़र कुन सूए मन
नफ़्स-ए-अमारा के फंदे में फँसा हूँ अल-इयाज़
दर तिरा बेकस पनाह कूचा तिरा आलम-ए-मलाज़
रहम फ़रमा या मलाज़ी लुत्फ़ फ़रमा या मआज़
हाज़िर दर है ग़ुलाम-ए-आस्ताँ बहर-ए-नवाज़
रूए रहमत बर-मताब ऐ महे जाँ अज़ रूए मन
हुरमत-ए-रूह-ए-पैग़म्बर यक नज़र कुन सूए मन
शहर-ए-यारा ऐ ज़ी-वकार ऐ बाग़-ए-आलम की बहार
बहर-ए-एहसाँ रशह-ए-नीसाँ जूद-ए-किर्दगार
हूँ ख़िज़ाँ ग़म के हाथों पामाली से दो-चार
अर्ज़ करता हूँ तेरे दर पर ब-चश्म-ए-अश्क-बार
रूए रहमत बर-मताब ऐ महे जाँ अज़ रूए मन
हुरमत-ए-रूह-ए-पैग़म्बर यक नज़र कुन सूए मन
बर सर-ए-परख़ाश है मुझ से अदू-ए-बे-तमीज़
रात दिन है दर-पए क़ल्ब-ए-हज़ीं नफ़्स-ए-रजीज़
मुब्तला है सौ बलाओं में मेरी जान-ए-अज़ीज़
हल्ल-ए-मुश्किल आप के आगे नहीं दुश्वार चीज़
रूए रहमत बर-मताब ऐ महे जाँ अज़ रूए मन
हुरमत-ए-रूह-ए-पैग़म्बर यक नज़र कुन सूए मन
एक जहाँ सैराब फ़ैज़-ए-अब्र है अब की बरस
तरनवा हैं बुलबुलें पड़ता है गोश-ए-गुल में रस
है यहाँ कश्त-ए-तमन्ना ख़ुश्क ओ ज़िन्दान-ए-क़फ़स
ऐ सहाब-ए-रहमत-ए-हक़ सूखे धानों पर बरस
रूए रहमत बर-मताब ऐ महे जाँ अज़ रूए मन
हुरमत-ए-रूह-ए-पैग़म्बर यक नज़र कुन सूए मन
फ़स्ल-ए-गुल आई अरूसान-ए-चमन हैं सब्ज़ा पोश
शादमानी का नवा-संजान-ए-गुलशन में है जोश
जो-बनों पर आ गया हुस्न-ए-बहार-ए-गुल फ़रोश
हाए ये रंग और मैं यूँ दाम में गुम-कर्दा होश
रूए रहमत बर-मताब ऐ महे जाँ अज़ रूए मन
हुरमत-ए-रूह-ए-पैग़म्बर यक नज़र कुन सूए मन
मुंकशिफ़ किस पर नहीं शान-ए-मुअल्ला का उरूज
आफ़ताब-ए-हक़ नुमा हो तुम को है ज़ेबा उरूज
मैं हज़ीज़-ए-ग़म में हूँ इमदाद हो शाहा उरूज
हर तरक़्क़ी पर तरक़्क़ी हो बढ़े दूना उरूज
रूए रहमत बर-मताब ऐ महे जाँ अज़ रूए मन
हुरमत-ए-रूह-ए-पैग़म्बर यक नज़र कुन सूए मन
ताइब हो पामाल-ए-लश्कर-ए-अफ़कार-ए-रूह
ता-ब-के तरसाँ रहे बे-मूनिस ओ ग़मख़्वार-ए-रूह
हो चली है काविश-ए-ग़म से निहायत ज़ार-ए-रूह
तालिब-ए-इमदाद है हर वक़्त ऐ दिलदार-ए-रूह
रूए रहमत बर-मताब ऐ महे जाँ अज़ रूए मन
हुरमत-ए-रूह-ए-पैग़म्बर यक नज़र कुन सूए मन
दबदबा में है फ़लक शौकत तिरा ऐ माह-ए-काख़
देखते हैं टोपियाँ थामे गदा ओ शाह-ए-काख़
क़स्र-ए-जन्नत से फ़ुज़ूँ रखता है इज़्ज़-ओ-जाह-ए-काख़
अब दिखा दे दीदा-ए-मुश्ताक़ को लिल्लाह काख़
रूए रहमत बर-मताब ऐ महे जाँ अज़ रूए मन
हुरमत-ए-रूह-ए-पैग़म्बर यक नज़र कुन सूए मन
बादलियां छाईं हवा बदली हुए शादाब बाग़
गुंचे चटके फूल महके बस गया दिल का दिमाग़
आह ऐ ज़ोर-ए-क़फ़स दिल है के महरूमी का दाग़
वाह ऐ लुत्फ़-ए-सबा गुल है तमन्ना का चिराग़
रूए रहमत बरमतब ऐ काम-ए-जां आज़रूरूए मन
हुरमत-ए-रूह-ए-पैम्बर यक नज़र कुन सूए मन
आसां है क़ौस-ए-फ़िक्र में तीर-ए-मेरा दिल हदफ़
नफ़्स-ओ-शैतां हर घड़ी कफ़ पर लब-ओ-ख़ंजर बकफ़
मुंतज़िर हूं मैं के अब आई सदा-ए-ला तख़फ़
सरवर-ए-दीं का तसदुक़ बहर-ए-सुल्तान-ए-नजफ़
रूए रहमत बरमतब ऐ काम-ए-जां आज़रूरूए मन
हुरमत-ए-रूह-ए-पैम्बर यक नज़र कुन सूए मन
बढ़ चला है आज कल अहबाब में जोश-ए-निफ़ाक़
ख़ुश मज़ाक़ान-ए-ज़माना हो चले हैं बद-मज़ाक़
सैकड़ों पर्दों में पोशीदा है हुस्न-ए-इत्तफ़ाक़
बरसर-ए-पैकार हैं आगे जो थे अहल-ए-वफ़ाक़
रूए रहमत बरमतब ऐ काम-ए-जां आज़रूरूए मन
हुरमत-ए-रूह-ए-पैम्बर यक नज़र कुन सूए मन
डर दरिंदों का अंधेरी रात सहरा होलनाक
राह ना मालूम रअशा पांव में लाखों मगाक
देख कर अब्र-ए-सियाह को दिल हुआ जाता है चाक
आइये इमदाद को वरना होता हूं हलाक
रूए रहमत बरमतब ऐ काम-ए-जां आज़रूरूए मन
हुरमत-ए-रूह-ए-पैम्बर यक नज़र कुन सूए मन