Home/Muhammad Ilyas Attar Qadri/Noor Wala Aaya Hai Hoor Le Kar Aaya Hai

नूर वाला आया है हूर लेकर आया है

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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नूर वाला आया है, हां नूर लेकर आया है सारे आलम में यह देखो नूर कैसा छाया है चार जानिब रोशनी है सब समां है नूर नूर हक़ ने पैदा आज अपने प्यारे को फ़रमाया है आओ आओ नूर की ख़ैरात लेने को चलें नूर वाला आमिना बीबी के घर में आया है आगे पीछे दाएं बाएं नूर है चारों तरफ आ गया है नूर वाला, नूर वाला आया है हो रही हैं चार जानिब बारिशें अनवार की छा गई निक्हत गुलों पर हर शजर इठलाया है ज़र्रा ज़र्रा जगमगाया हर तरफ आया निखार गोया सारी ही फ़ज़ा को नूर में नहलाया है नूर वाले के रुखे रौशन की क्या तारीफ़ हो चेहराए अनवर के आगे चांद भी शरमाया है छत पे काबे की उतर कर हुक्मे रब्बे पाक से हज़रते जिब्रील ने झंडा वहां लहराया है चार सू छाई हुई थीं कुफ़्र की तारिकियां तुम ने आकर नूर से संसार को चमकाया है जूं ही आमद माहे मिलादे मुबारक की हुई अहले ईमां झूम उठे शैतां को ग़ुस्सा आया है जब अंधेरे घर में आए नूर से घर भर गया गुमशुदा सुई को बीबी आयशा ने पाया है ऐ ख़ुदाए दो जहां एहसान तेरा है बड़ा तू ने पैदा उन की उम्मत में हमें फ़रमाया है नूर वाले हम गुनहगारों के घर भी रोशनी आ के कर दो, नूर तुम ने हर जगह फैलाया है अपना जाना और है उन का बुलाना है दीगर ख़ुश नसीबी उन की जिन को शाह ने बुलवाया है मुझ को ढ़ा रस है ग़ुलामे सईदे अबरार हूं मासवा पल्ले मेरे कुछ नहीं सरमाया है नूर वाले! अब ख़ुदारा मुस्कुराते आइए रोशनी हो क़ब्र में हाय! अंधेरा छाया है सुन ले शैतां तू दबा सकता नहीं अत्तार को दो जहां में इस पे मीठे मुस्तफ़ा का साया है