Home/Muhammad Ilyas Attar Qadri/Phir ata kar dijiye Hajj ki sa'adat Ya Rasul

फिर अता कर दीजिये हज की सआदत या रसूल

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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फिर अता कर दीजिये हज की सआदत या रसूल हो मदीने की इजाज़त भी इनायत या रसूल हज का मौसम आ गया, तुझ ने बाँधी कमर मेरे हज की भी कोई हो जाए सूरत या रसूल चल पड़े हैं काफ़िलों पर काफ़िले सू-ए-हिजाज़ मैं रहा जाता हूँ हाय! जान-ए-रहमत या रसूल या रसूल अल्लाह! सदका फ़ातिमा के लाल का दीजिये मुझ को मदीने की इजाज़त या रसूल सब्ज़ गुम्बद की फ़ज़ाओं में बुला लो मुझे अज़ पये शाह-ए-इमाम-ए-अहले सुन्नत या रसूल गर मेरी तक़दीर में दूरी लिखी है या नबी हर घड़ी मुझ को लाए तेरी फ़ुर्क़त या रसूल सदका सिद्दीक़ ओ उमर उस्मान ओ हैदर का हुज़ूर ग़म मदीने का मुझे कर दो इनायत या रसूल दिल से दुनिया की मुहब्बत दूर कर के दीजिये अपनी उल्फ़त अपनी चाहत दर्द-ओ-रुक़त या रसूल ताज-ए-सुल्तानी है मेरी ठोकरों पर या नबी तेरा नअल-ए-पाक मेरा ताज-ए-इज़्ज़त या रसूल टूट जाए दम मदीने में शहा! अत्तार का और बक़ी-ए-पाक में बन जाए तुर्बत या रसूल