फिर अता कर दीजिये हज की सआदत या रसूल
हो मदीने की इजाज़त भी इनायत या रसूल
हज का मौसम आ गया, तुझ ने बाँधी कमर
मेरे हज की भी कोई हो जाए सूरत या रसूल
चल पड़े हैं काफ़िलों पर काफ़िले सू-ए-हिजाज़
मैं रहा जाता हूँ हाय! जान-ए-रहमत या रसूल
या रसूल अल्लाह! सदका फ़ातिमा के लाल का
दीजिये मुझ को मदीने की इजाज़त या रसूल
सब्ज़ गुम्बद की फ़ज़ाओं में बुला लो मुझे
अज़ पये शाह-ए-इमाम-ए-अहले सुन्नत या रसूल
गर मेरी तक़दीर में दूरी लिखी है या नबी
हर घड़ी मुझ को लाए तेरी फ़ुर्क़त या रसूल
सदका सिद्दीक़ ओ उमर उस्मान ओ हैदर का हुज़ूर
ग़म मदीने का मुझे कर दो इनायत या रसूल
दिल से दुनिया की मुहब्बत दूर कर के दीजिये
अपनी उल्फ़त अपनी चाहत दर्द-ओ-रुक़त या रसूल
ताज-ए-सुल्तानी है मेरी ठोकरों पर या नबी
तेरा नअल-ए-पाक मेरा ताज-ए-इज़्ज़त या रसूल
टूट जाए दम मदीने में शहा! अत्तार का
और बक़ी-ए-पाक में बन जाए तुर्बत या रसूल