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Phir Gumbad-e-Khizra ki fazaon mein bulalo

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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फिर गुंबद-ए-ख़ज़रा की फ़ज़ाओं में बुलालो सरकार! बुला कर मुझे क़दमों से लगालो क़दमों से लगा कर मुझे दीवाना बनालो दुनिया की मोहब्बत को मरे दिल से निकालो गो ख़्वार-ओ-गुनाहगार हूँ जैसा हूँ तुम्हारा सरकार! संभालो मुझे सरकार संभालो सदक़ा मुझे सरकार! नवासों का अता हो अग्यार के टुकड़ों से शहंशाह बचालो या शाह-ए-मदीना! मरी इमदाद को आओ आफ़ात-ओ-बलियात के पंजों से निकालो तूफ़ान की मौजों में जहाज़ अपना घिरा है सरकार! बचालो इसे सरकार! बचालो सरकार! मरे ख़ून का प्यासा हुआ दुश्मन शहज़ादों का सदक़ा मुझे दुश्मन से बचालो उजड़ हो हुई जाती है मेरी ज़ीस्त की बस्ती हो जाए गी आबाद नज़र लुत्फ़ की डालो वीरान हुआ जाता है खुशियों का गुलिस्तां इस उजड़े चमन पर भी निगाह लुत्फ़ की डालो दम तोड़ने वाला है गुनाहों का मरीज़ अब ऐ जान-ए-मसीहा! इसे तुम आ के बचा लो मरने का शरफ़ अब तो मदीने में अता हो दर दर की मुझे ठोकरों से शाह बचा लो मदफ़न हो अता मीठे मदीने की गली में लिल्लाह पड़ोसी मुझे जन्नत में बना लो खेंचे लिए जाते हैं जहन्नुम को मलाइका ऐ शाफ़िए-महशर पये शैखैन बचा लो फ़ुरक़त में तड़पते हैं जो मिस्कीन बेचारे अस्बाब अता कर के उन्हें दर पे बुला लो महबूबे-ख़ुदा! सर पे अजल आ के खड़ी है शैतान से अत्तार का ईमान बचा लो