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क़ाफ़िला आज मदीने को रवाना होगा

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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क़ाफ़िला आज मदीने को रवाना होगा (अल्हम्दुलिल्लाह अज़्ज़वजल्ल ज़ुल-हिज्जत-उल-हराम शरीफ़ 1416 हि. को रवानगी मदीना मुनव्वरा ज़ादहा-अल्लाहु शरफ़न व तअज़ीमन से क़ब्ल मक्का मुकर्रमा ज़ादहा-अल्लाहु शरफ़न व तअज़ीमन में यह कलाम तहरीर करने की सआदत हासिल हुई) क़ाफ़िला आज मदीने को रवाना होगा अन्क़रीब अपना मदीने में ठिकाना होगा लब पे नग़मात-ए-मुहम्मद का तराना होगा झूमते झूमते दीवाना रवाना होगा किस क़दर ज़ाइर! वो वक़्त सुहाना होगा रू-ब-रू जब दर-ए-सुल्तान-ए-ज़माना होगा दर्द-ओ-आलाम का जब लब पे फ़साना होगा अब्र-ए-रहमत के बरसने का बहाना होगा नेकियां पल्ले मदीने के मुसाफ़िर के कहां! आंसुओं का मेरी झोली में ख़ज़ाना होगा इतनी बे-ताब न हो आने दे तैबा की गली रूह-ए-मुज़्तर तुझे कुछ वक़्त बढ़ाना होगा