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रज़ा पर रब की राज़ी हैं हम भिखारी हैं

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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रज़ा पर रब की राज़ी हैं हम भिखारी हैं हमारी आख़िरत बेहतर बना दो या रसूल अल्लाह गुनाहों से मैं तौबा कर रहा हूँ तुम शाहिद मुझे अपने ख़ुदा से बख्शवा दो या रसूल अल्लाह मुझे सकरात में कलमा पढ़ा कर मीठी नींद करम से अपने क़दमों में सुला दो या रसूल अल्लाह तुम्हारी याद में हर दम तड़पता ही रहूँ आक़ा! मरे सीने में इश्क़ ऐसा रचा दो या रसूल अल्लाह मुझे इज़न-ए-मदीना दो तुम्हें सदक़ा नवासों का दिखा दो गुम्बद-ए-ख़ज़रा दिखा दो या रसूल अल्लाह मरी तारीक रातें जगमगा दो अज़ पये शैखैन मुझे तुम जल्वा-ए-ज़ेबा दिखा दो या रसूल अल्लाह शहा अत्तार का प्यारा है ये मुश्ताक़ अत्तार यही मुर्दा उसे तुम भी सुना दो या रसूल अल्लाह अंधेरी क़ब्र में अत्तार पर अब ख़ौफ़ तारी है पये क़ुत्ब-ए-मदीना जगमगा दो या रसूल अल्लाह