हज़रत सय्यिदुना उसैद बिन अबी अनास रदियल्लाहु तआला अन्हु फ़रमाते हैं: मदीने के ताजदार, शहंशाह-ए-आली वक़ार सल्लल्लाहु तआला अलैहि वा-आलिही वसल्लम ने एक बार मेरे चेहरे और सीने पर अपना दस्त-ए-पुर-अनवार फेर दिया, इस की बरकत यह ज़ाहिर हुई कि मैं जब भी किसी अंधेरे घर में दाख़िल होता वह रौशन हो जाता।
(अल-ख़साइस-उल-कुब्रा, ज २, स ४२ व तारीख-ए-दमिशक़, ज २०, स २१)