Home/Muhammad Ilyas Attar Qadri/Rotay hain jo deewanay be-taab hain mastanay

रोते हैं जो दीवाने बे-ताब हैं मस्ताने

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

100%
रोते हैं जो दीवाने बे-ताब हैं मस्ताने उन सब को दिखा दीजे दरबार मदीने का रोता है जो उम्मत की मोहब्बत में वह शाफ़ि-ए-महशर है सरदार मदीने का रातों को जो रोता है और ख़ाक पे सोता है ग़म-ख़्वार है, सादा है मुख़्तार मदीने का क़ब्ज़े में दो आलम हैं पर हाथ का तकिया है सोता है चटाई पर सरदार मदीने का दुख दर्द जहां के सब दूर शहा करके मुझ को तो बना लीजे बीमार मदीने का इस दर के भिखारी की झोली में दो आलम हैं शाहों से भी बढ़ कर है नादार मदीने का मक़बूल जहां भर में हो दावत-ए-इस्लामी सदक़ा तुझे ऐ रब-ए-ग़फ़्फ़ार! मदीने का तक़दीर चमक उठे क़िस्मत ही तो खुल जाए बन जाए जो अदना सग, अत्तार मदीने का