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Shadaid-e-Naz ke Kaisay Sahoon Ga Ya Rasool Allah

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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शदाइद-ए-नज़ के कैसे सहूँ गा या रसूल अल्लाह अंधेरी क़ब्र में कैसे रहूँ गा या रसूल अल्लाह मुझे मरना है आक़ा गुम्बद-ए-ख़ज़रा के साए में वतन में मरगया तो क्या करूँ गा या रसूल अल्लाह न छोटे जुर्म छूटते हैं न मारे नफ़्स मरता है न जाने नेक आखिर कब बनूँ गा या रसूल अल्लाह सदा मीठी नज़र रखना अगर तुम हो गए नाराज़ न हरगिज़ मैं कहीं का भी रहूँ गा या रसूल अल्लाह अंधेरा काट खाता है अकेले ख़ौफ़ आता है तो तन्हा क़ब्र में क्योंकर रहूँ गा या रसूल अल्लाह नकीरैन इम्तिहाँ लेने को जब आएँगे तुर्बत में जवाबात उन को आक़ा कैसे दूँ गा या रसूल अल्लाह बराए नाम दर्द-ए-सर सहा जाता नहीं मुझ से अज़ाब-ए-क़ब्र कैसे सहूँ गा या रसूल अल्लाह यहाँ चींटी भी तड़पा दे मुझे तो क़ब्र के अंदर मैं क्योंकर डंक बेचूँगा या रसूल अल्लाह यहाँ मामूली गर्मी भी सही जाती नहीं मुझ से तो गर्मी-ए-हश्र की कैसे सहूँगा या रसूल अल्लाह ज़मीन तपती हुई ख़ुर्शीद भी शोला फ़िशाँ होगा बरहना-पा खड़ा कैसे रहूँगा या रसूल अल्लाह सर-ए-महशर बला की धूप है आक़ा करम कर दो मैं क्या महरूम-ए-कौसर से रहूँगा या रसूल अल्लाह गुनाहों के घुले दफ़्तर खड़ा हूँ आह! मीज़ाँ पर नहीं हैं नेकियाँ अब क्या करूँगा या रसूल अल्लाह है सर पर बार-ए-इसयाँ पुल-ए-सिरात अब पार हो कैसे! संभालो वरना दोज़ख़ में गिरूँगा या रसूल अल्लाह बरोज़-ए-हश्र गर चश्म-ए-करम मुझ पर न की तुम ने मैं जा कर किस के दामन में छुपूँगा या रसूल अल्लाह मैं मुजरिम हूँ जहन्नम में अगर फेंका गया मुझ को हलाकत होगी हाय! क्या करूँगा या रसूल अल्लाह पक कर आग के शोले लिपटते होंगे बर्बादी करम कर दो ये सब कैसे सहूँगा या रसूल अल्लाह अंधेरी आग होगी रोशनी बिल्कुल नहीं होगी करम कर दो ये सब कैसे सहूँगा या रसूल अल्लाह वहाँ कानों में, आँखों में, दहन में, पेट में भी आग! करम कर दो ये सब कैसे सहूँगा या रसूल अल्लाह जबल-ए-नार होंगे वादियाँ भी नार की होंगी करम कर दो ये सब कैसे सहूँगा या रसूल अल्लाह फ़रिश्ते डांटते होंगे हथौड़े मारते होंगे करम कर दो ये सब कैसे सहूँगा या रसूल अल्लाह वहाँ साँप और बिच्छू भी मुसलसल डस रहे होंगे करम कर दो ये सब कैसे सहूँगा या रसूल अल्लाह ग़िज़ा दोज़ख़ की थोहर और ऊपर घोलता पानी करम कर दो ये सब कैसे सहूँगा या रसूल अल्लाह न मांगे मौत आएगी न बेहोशी ही छाएगी करम कर दो ये सब कैसे सहूँगा या रसूल अल्लाह जो तुम चाहोगे तो होंगी मेरी सब मुश्किलें आसाँ वगरना नार में, मैं जा पड़ूँगा या रसूल अल्लाह तुम्हारा हूँ ग़ुलाम और है ग़ुलामी पर मुझे तो नाज़ करम से साथ जन्नत में चलूँगा या रसूल अल्लाह ज़बान पर होगा उस दम या रसूल अल्लाह का नारा बरोज़-ए-हश्र जिस दम मैं उठूँगा या रसूल अल्लाह ग़म-ए-उम्मत में रोता देख कर तुम को सर-ए-महशर शह! क़ाबू में कैसे दिल रखूँगा या रसूल अल्लाह सुनो या मत सुनो मैं तो पुकारे जाऊँगा तुम को जहाँ में जब तलक आक़ा! जीऊँगा या रसूल अल्लाह करम फ़रमा कि हो अत्तार भी इस क़ौल का मिसदाक़ तेरी ख़ातिर जीऊँगा और मरूँगा या रसूल अल्लाह