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शह-ए-अर्श-ए-आला सलाम-उन-अलैकुम

Written by Maulana Muhammad Jamil-ur-Rehman Razvi

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शह-ए-अर्श-ए-आला सलाम-उन-अलैकुम हबीब-ए-ख़ुदाया सलाम-उन-अलैकुम मरे माह-ए-तैयबा सलाम-उन-अलैकुम शहंशाह-ए-बतहा सलाम-उन-अलैकुम ख़बर जिन के आने की थी मुद्दतों से हुआ जलवा फ़रमा सलाम-उन-अलैकुम जो तशरीफ़ लाए वो सुल्तान-ए-आलम तो काबा पुकारा सलाम-उन-अलैकुम दो आलम का आक़ा व मौला बना कर तुम्हें हक़ ने भेजा सलाम-उन-अलैकुम ये आवाज़ हर सम्त से आ रही है शह-ए-दीन व दुनिया सलाम-उन-अलैकुम तमन्ना है अपनी मदीने पहुँच कर कहूँ पेश-ए-रौज़ा सलाम-उन-अलैकुम दुआ है के जब वक़्त हो जां-कनी का हो लब पर वज़ीफ़ा सलाम-उन-अलैकुम जमील अपने आक़ा शफ़ी-ए-उमम पर पढ़े जा हमेशा सलाम-उन-अलैकुम