शह-ए-अर्श-ए-आला सलाम-उन-अलैकुम
हबीब-ए-ख़ुदाया सलाम-उन-अलैकुम
मरे माह-ए-तैयबा सलाम-उन-अलैकुम
शहंशाह-ए-बतहा सलाम-उन-अलैकुम
ख़बर जिन के आने की थी मुद्दतों से
हुआ जलवा फ़रमा सलाम-उन-अलैकुम
जो तशरीफ़ लाए वो सुल्तान-ए-आलम
तो काबा पुकारा सलाम-उन-अलैकुम
दो आलम का आक़ा व मौला बना कर
तुम्हें हक़ ने भेजा सलाम-उन-अलैकुम
ये आवाज़ हर सम्त से आ रही है
शह-ए-दीन व दुनिया सलाम-उन-अलैकुम
तमन्ना है अपनी मदीने पहुँच कर
कहूँ पेश-ए-रौज़ा सलाम-उन-अलैकुम
दुआ है के जब वक़्त हो जां-कनी का
हो लब पर वज़ीफ़ा सलाम-उन-अलैकुम
जमील अपने आक़ा शफ़ी-ए-उमम पर
पढ़े जा हमेशा सलाम-उन-अलैकुम