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शाह वाला मुझे तय्यबा बुला लो

Written by Mustafa Raza Khan Qadri

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शाह वाला मुझे तय्यबा बुला लो तय्यबा बुला लो मुझे तय्यबा बुला लो ड्योढ़ी का अपनी कुत्ता बना लो क़दमों से अपने मुझे को लगा लो सदक़े में सदक़े में सदक़े बुला लो फ़ुर्क़त के मारे को प्यारे जला लो प्यारे जलालु मुझे प्यारे जलालु मौला जलालु मुझे आक़ा जलालु दुनिया के झगड़ों से यकसर छुड़ा कर ग़ैरों की उल्फ़त को दिल से मिटा कर शाह वाला मुझे अपना बना लो अपना बना लो मुझे अपना बना लो नेकों के सदक़े में हम से बदों को ज़ार ओ नज़ार ओ मुसीबत ज़दों को मौला निभा लो मेरे मौला निभा लो हाँ हाँ निभा लो मेरे मौला निभा लो होते हो तुम क्यों मायूस ओ मुज़्तर किस वास्ते हो हैरान ओ शशदर दुख दर्द वालो सुनो दुख दर्द वालो तय्यबा से हर एक अपनी दवा लो दारुश्शिफ़ाए तय्यबा में आओ जो मांगो फ़ौरन मुंह मांगी पाओ अंदोह ओ ग़म सब अपने मिटा लो रंज ओ अलम सब दिल से निकालो आंखों में आओ दिल में समाओ परदा उठाओ जलवा दिखाओ हसरत ज़दा की प्यारे दुआ लो हसरत निकालो मेरी हसरत निकालो बाद-ए-मुखालिफ़ तेज़ आ रही है कश्ती हमारी चकरा रही है मंजधार में है मौला बचा लो प्यारे बचा लो मुझे शाहा बचा लो डोलत है नैया मोरी भंवर में मौला तराओ एके नज़र में मोरी घबरिया मोरे पिया लो मो को बचा लो पिया मो को बचा लो ताइब हूं नज्दी आइब हूं नज्दी और ये न हो तो खाइब हूं नज्दी ग़ाइब हूं नज्दी मौला निकालो जल्दी निकालो इन्हें जल्दी निकालो ये नूरी मुज़्तर तेरा सनागर और इसका घर भर हो हाज़िर दर अपने गदागर को दर पर बुला लो अमन ओ अमान से हमें सरवर बुला लो