Home/Muhammad Ilyas Attar Qadri/Sharaf de hajj ka mujhe mere Kibriya ya Rab

Sharaf de hajj ka mujhe mere Kibriya ya Rab

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

100%
शर्फ दे हज का मुझे मेरे किब्रिया या रब! रवाना सूए मदीना हो क़ाफ़िला या रब! दिखा दे एक झलक सब्ज़ सब्ज़ गुम्बद की बस उन के जलवों में आ जाए फिर क़ज़ा या रब! मदीने जाएं फिर आएं दोबारा फिर जाएं इसी में उम्र गुज़र जाए या ख़ुदा या रब! मरा हो गुम्बद-ए-ख़ज़रा की ठंडी छांव में रसूल-ए-पाक के क़दमों में खातमा या रब! ब-वक़्त-ए-नज़अ सलामत रहे मेरा ईमान मुझे नसीब हो तौबा है इल्तिजा या रब! जो "दीन का काम" करें दिल लगा के या अल्लाह उन्हें हो ख्वाब में दीदार-ए-मुस्तफ़ा या रब! तेरी मोहब्बत उतर जाए मेरी नस नस में पए रज़ा हो अता इश्क़-ए-मुस्तफ़ा या रब ज़माने भर में मचा दें गे धूम सुन्नत की अगर करम ने तेरे साथ दे दिया या रब नमाज़ ओ रोज़ा ओ हज्ज ओ ज़कात की तौफ़ीक़ अता हो उम्मत-ए-महबूब को सदा या रब जवाब-ए-क़ब्र में मुनकर नकीर को दूं गा तेरे करम से अगर हौसला मिला या रब बरोज़-ए-हश्र छलकता सा जाम-ए-कौसर का ब-दस्त-ए-साक़ी-ए-कौसर हमें पिला या रब बक़ी-ए-पाक में अत्तार दफ़न हो जाए बराए ग़ौस ओ रज़ा अज़ पए ज़िया या रब