शर्फ दे हज का मुझे मेरे किब्रिया या रब!
रवाना सूए मदीना हो क़ाफ़िला या रब!
दिखा दे एक झलक सब्ज़ सब्ज़ गुम्बद की
बस उन के जलवों में आ जाए फिर क़ज़ा या रब!
मदीने जाएं फिर आएं दोबारा फिर जाएं
इसी में उम्र गुज़र जाए या ख़ुदा या रब!
मरा हो गुम्बद-ए-ख़ज़रा की ठंडी छांव में
रसूल-ए-पाक के क़दमों में खातमा या रब!
ब-वक़्त-ए-नज़अ सलामत रहे मेरा ईमान
मुझे नसीब हो तौबा है इल्तिजा या रब!
जो "दीन का काम" करें दिल लगा के या अल्लाह
उन्हें हो ख्वाब में दीदार-ए-मुस्तफ़ा या रब!
तेरी मोहब्बत उतर जाए मेरी नस नस में
पए रज़ा हो अता इश्क़-ए-मुस्तफ़ा या रब
ज़माने भर में मचा दें गे धूम सुन्नत की
अगर करम ने तेरे साथ दे दिया या रब
नमाज़ ओ रोज़ा ओ हज्ज ओ ज़कात की तौफ़ीक़
अता हो उम्मत-ए-महबूब को सदा या रब
जवाब-ए-क़ब्र में मुनकर नकीर को दूं गा
तेरे करम से अगर हौसला मिला या रब
बरोज़-ए-हश्र छलकता सा जाम-ए-कौसर का
ब-दस्त-ए-साक़ी-ए-कौसर हमें पिला या रब
बक़ी-ए-पाक में अत्तार दफ़न हो जाए
बराए ग़ौस ओ रज़ा अज़ पए ज़िया या रब