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Shehanshah-e-Baghdad Ya Ghous-e-Azam

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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शहंशाह-ए-बग़दाद या ग़ौस-ए-आज़म सुनो मेरी फ़र्याद या ग़ौस-ए-आज़म बुला लीजिये बग़दाद या ग़ौस-ए-आज़म सुनाई है रूएदाद या ग़ौस-ए-आज़म लगा कर मुझे अपने क़दमों से मुर्शद मेरा दिल करो शाद या ग़ौस-ए-आज़म तेरे पाक जलवों से या पीर-ओ-मुर्शद मेरा दिल हो आबाद या ग़ौस-ए-आज़म पिला जाम ऐसा सिवा तेरे आक़ा न कुछ भी रहे याद या ग़ौस-ए-आज़म मरे क़ल्ब से हुब-ए-दुनिया की मुर्शद उखड़ जाए बुनियाद या ग़ौस-ए-आज़म रहे मुझ पे मीठी नज़र मुर्शदी गर पड़े कुछ न अफ़ाद या ग़ौस-ए-आज़म तेरे होते या पीर! रंज-ओ-अलम की करूँ किस से फ़र्याद या ग़ौस-ए-आज़म तेरे दर के मंगते सब अग़वास-ओ-अक़ताब और अबदाल-ओ-औताद या ग़ौस-ए-आज़म मुकर्रम शहा तेरे सारे के सारे हैं आबा-ओ-अजदाद या ग़ौस-ए-आज़म शहाँ काश! दर का बना लेती कुत्ता मुझे तेरी औलाद या ग़ौस-ए-आज़म रहें शाद-ओ-आबाद आलम में मेरे सभी घर के अफ़राद या ग़ौस-ए-आज़म मुझे प्यारे ग्यारह भी बारह भी पच्चीस के लगते हैं आदाद या ग़ौस-ए-आज़म अदु क़त्ल करने के दर पे हुआ है मदद शाह-ए-बग़दाद या ग़ौस-ए-आज़म अदु तो मुखालिफ़ थे पहले ही से अब बढ़ा ज़ोर हुस्साद या ग़ौस-ए-आज़म गुनाहों ने मुझ को कहीं का न छोड़ा न हो जाऊँ बर्बाद या ग़ौस-ए-आज़म मुझे नफ़्स-ए-ज़ालिम पे कर दीजिये ग़ालिब हो नाकाम हमज़ाद या ग़ौस-ए-आज़म दम-ए-नज़अ दीदार की भीक देना चले जाँ मरी शाद या ग़ौस-ए-आज़म गिरफ़्तार-ए-रंज-ओ-बला ये गदा है करो आकर आज़ाद या ग़ौस-ए-आज़म "ये अत्तार मेरा है" मुर्शद ख़ुदारा सुना दो ये इरशाद या ग़ौस-ए-आज़म