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Shukriya Aap Ka Baghdad Bulaya Ya Ghaus

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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शुक्रिया आप का बग़दाद बुलाया या ग़ौस मुझ गुनहगार को मेहमान बनाया या ग़ौस मर्तबा यूं तेरा ख़ालिक़ ने बढ़ाया या ग़ौस औलिया का तुझे सुल्तान बनाया या ग़ौस याद-ए-तैयबा से बसा दीजे सीना मेरा अर्ज़ ये शहर-ए-कराची से हूं लाया या ग़ौस मैं निकम्मा तो किसी काम के क़ाबिल ही न था मुझ से बे-कार को तुम ने ही निभाया या ग़ौस क़ाबिल-ए-रश्क है वल्लाह वो क़िस्मत वाला तू ने सुन्ता जिसे अपना है बनाया या ग़ौस क़ल्ब-ए-मुर्दा को भी ठोकर से जला दो मुर्शिद बलयक़ीन तुम ने तो मुर्दों को जलाया या ग़ौस आफ़तों में हूं गिरफ़्तार मदद को आओ आह! दुनिया के ग़मों ने है सताया या ग़ौस ला तख़फ़ हश्र में कहते हुए आ जाना तुम जैसे दुनिया में ये इर्शाद सुनाया या ग़ौस तेरे दामन से लिपट कर मैं मचल जाऊंगा मुझ को जिस दम सर-ए-महशर नज़र आया या ग़ौस मैं जहन्नम में न अब जाऊंगा इन शा अल्लाह रहनुमा तुम को जो मैं ने है बनाया या ग़ौस शाह-ए-बग़दाद! हो अत्तार पे नज़र-ए-रहमत! ख़ाली कासा लिए है दूर से आया या ग़ौस