Home/Muhammad Ilyas Attar Qadri/Sunniyon ke dil mein hai izzat "Waqar-ud-Din" ki

Sunniyon ke dil mein hai izzat "Waqar-ud-Din" ki

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

100%
सुन्नियों के दिल में है इज़्ज़त "वकारुद्दीन" की आज भी ममनून है मिल्लत "वकारुद्दीन" की आप अल्लामा-ओ-मुफ़्ती और थे शैखुल-हदीस आज भी है क़ल्ब में अज़मत "वकारुद्दीन" की सिर्फ़ आलिम ही नहीं थे आप आलिम-गर भी थे मरहबा थी ख़ूब इल्मियत "वकारुद्दीन" की बे-अदद उलेमा ने ज़ानू-ए-तल्मज़ तह किए क्या बयां हो शान-ए-इल्मियत "वकारुद्दीन" की इनशा-अल्लाह काम आएगी मुझे रोज़-ए-जज़ा क़द्र-दानी इल्म की उल्फ़त "वकारुद्दीन" की इनशा-अल्लाह वो बरोज़-ए-हश्र बख्शा जाएगा जिस को हासिल हो गई निस्बत "वकारुद्दीन" की वो मुजस्सम आजीज़ी थे और सरापा सादगी इस लिए तो दिल में है पयत "वकारुद्दीन" की चारपाई और तकिया और लोटा जाए-नमाज़ थी सरापा सादा ही तीन्वत "वकारुद्दीन" की चारपाई पर वो होते और हम भी रूबरू याद आती है हमें सुहबत "वकारुद्दीन" की आए दिन ख़िदमत में आ कर हम मसाइल पूछते याद आती है हमें सुहबत "वकारुद्दीन" की नुक्ता-दानी, मूशगाफ़ी और गुल-अफ़्शानियां याद आती है हमें सुहबत "वकारुद्दीन" की ख़ंदा पेशानी तबस्सुम-रेज़ मीठी गुफ़्तगू याद आती है हमें सुहबत "वकारुद्दीन" की इन को सीने से लगाया मुस्तफ़ा ने ख़्वाब में क़ाबिल-ए-सद रश्क है क़िस्मत वकारुद्दीन की बंदा-ए-बदकार हूँ अफ़सोस मैं बेकार हूँ कुछ न मुझ से हो सकी ख़िदमत वकारुद्दीन की सब मुरीदों के लिए सारे मुहिब्बों के लिए सानिहा-ए-जाँ सोज़ था रिहलत वकारुद्दीन की