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Tajdar-e-Haram Ae Shehanshah-e-Deen tum pe har dam karoron durood-o-salam

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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ताजदार-ए-हरम ऐ शहंशाह-ए-दीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरुद-ओ-सलाम ताजदार-ए-हरम ऐ शहंशाह-ए-दीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरुद-ओ-सलाम हो करम मुझ पे या सय्यद-उल-मुरसलीन तुम पे हर दम करोड़ों दुरुद-ओ-सलाम दूर रह कर न दम टूट जाए कहीं काश! तैय्यबा में ऐ मेरे माह-ए-मुबीन दफ़न होने को मिल जाए दो गज़ ज़मीन तुम पे हर दम करोड़ों दुरुद-ओ-सलाम कोई हुस्न-ए-अमल पास मेरे नहीं फंस न जाऊं क़यामत में मौला कहीं ऐ शफ़ी-ए-उमम लाज रखना तुम्हें तुम पे हर दम करोड़ों दुरुद-ओ-सलाम दोनों आलम में कोई भी तुम सा नहीं सब हसीनों से बढ़ कर के तुम हो हसीं क़ासिम-ए-रिज़्क़-ए-रब्ब-उल-उला हो तुम्हें तुम पे हर दम करोड़ों दुरुद-ओ-सलाम फ़िक्र-ए-उम्मत में रातों को रोते रहे आसियों के गुनाहों को धोते रहे तुम पे क़ुर्बान जाऊं मरे माह-ए-जबीन! तुम पे हर दम करोड़ों दुरुद-ओ-सलाम फूल रहमत के हर दम लुटाते रहे यां ग़रीबों की बिगड़ी बनाते रहे हौज़-ए-कौसर पे मत भूल जाना हमें तुम पे हर दम करोड़ों दुरुद-ओ-सलाम ज़ुल्म, कुफ़्फ़ार के सहते रहे फिर भी हर आन हक़ बात कहते रहे कितनी मेहनत से की तुम ने तब्लीग-ए-दीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरुद-ओ-सलाम मौत के वक़्त कर दो निगाह-ए-करम काश इस शान से यह निकल जाए दम संग-ए-दर पर तुम्हारे हो मेरी जबीन तुम पे हर दम करोड़ों दुरुद-ओ-सलाम अब मदीने में हम को बुला लीजिये और सीना मदीना बना दीजिये अज़ पए ग़ौस-ए-आज़म इमाम-ए-उमम तुम पे हर दम करोड़ों दुरुद-ओ-सलाम इश्क़ से तेरे मामूर सीना रहे लब पे हर दम "मदीना मदीना" रहे बस में दीवाना बन जाऊं सुलतान-ए-दीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरुद-ओ-सलाम दूर हो जाएं दुनिया के रंज-ओ-अलम हो अता अपना ग़म दीजिये चश्म-ए-नम माल-ओ-दौलत की कसरत का तालिब नहीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरुद-ओ-सलाम अब बुला लो मदीने में अत्तार को अपने क़दमों में रख लो गुनहगार को कोई इस के सिवा आरज़ू ही नहीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरुद-ओ-सलाम