नक्शा नवीस-ए-बरेलवी
मदहत-ए-सरवर-ए-दीं मेरे मुहिब ने लिखी
बिल-यक़ीन गुलशन-ए-फ़िरदौस की होगी यह सबील
वाह वाह कह के रज़ा ने यह लिखा तब्अ का सन
चमन-ए-नअत का गुलदस्ता है दीवान-ए-जमील
१३३२ हिजरी १३२१ हिजरी
ऐज़न
यह गुलदस्ता-ए-नअत कैसा छुपा है
कि ख़ुशबू से जिस की मुअत्तर ज़मीन है
सना-ए-नबी मदहत-ए-ग़ौस-ए-आज़म
कहीं है गुलाब और कहीं यासमन है