मुझे दीदे ईमान पर इस्तिक़ामत, पये सय्यद-ए-मुह्तशम या इलाही
मरे सर पे इसयाँ का बार-ए-आह मौला! बढ़ा जाता है दम-ब-दम या इलाही
ज़मीं बोझ से मेरे फटती नहीं है, ये तेरा ही तो है करम या इलाही
ह़ुक़ूक़-उल-इबाद! आह! होगा मरा क्या! करम मुझ पे कर दे करम या इलाही
बड़ी कोशिशें की गुनाह छोड़ने की, रहे आह! नाकाम हम या इलाही
मुझे सच्ची तौबा की तौफ़ीक़ दीदे, पये ताजदार-ए-हरम या इलाही
जो नाराज़ तू हो गया तो कहीं का, रहूँगा न तेरी क़सम या इलाही
मुझे नार-ए-दोज़ख़ से डर लग रहा है, हो मुझ नातवाँ पर करम या इलाही
सदा केलिए हो जा राज़ी ख़ुदाया, हमेशा हो लुत्फ़-ओ-करम या इलाही
ख़ुदाया बुरे ख़ात्मे से बचाना, पढ़ूँ कलमा जब निकले दम या इलाही
गुनाहों से भर पूर नामा है मेरा, मुझे बख़्श दे कर करम या इलाही
टलें मेरे आमाल-ए-मीज़ां पे जिस दम, पड़े एक भी नेकी न कम या इलाही
मैं था लायक़-ए-नार-ए-दोज़ख़ ख़ुदाया, दी जन्नत है कितना करम या इलाही