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Teen Roza Ijtima-e-Pak ke Multan mein

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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तीन रोज़ा इज्तिमा-ए-पाक के मुल्तान में हर तरफ से आ रहे हैं क़ाफ़िले मुल्तान में आज ”सहरा-ए-मदीना“ में है क्या आई बहार चार सू हैं रहमतों के गुल खिले मुल्तान में हैं आलमी हमारा इज्तिमा-ए-पाक है हैं कई मुल्कों से आए क़ाफ़िले मुल्तान में इज्तिमा-ए-पाक या रब! इब्तिदा ता इंतिहा ख़ैर से हो ख़ैर से हो ख़ैर से मुल्तान में मैले मंसूबे अदु के ख़ाक में मिल जाएं सब दे तहफ़्फ़ुज़ या ख़ुदा अशरार से मुल्तान में नीयतें कर लो, करेंगे इनफिरादी कोशिशें और मिलेंगे बढ़ के हर एक से मुल्तान में सब करो नियत, करेंगे काफिलों में हम सफर अब बहुत सारे बनेंगे काफिले मुल्तान में मजलिसे शूरा का जो भी है वफादार ऐ खुदा अब्र-ए-रहमत उस पे बरसा ज़ोर से मुल्तान में या खुदा वो हज करे बैठा मदीना देख ले गौर से हर एक बयां जो भी सुने मुल्तान में चोर डाकू आ गए आकर हिदायत पा गए बे-नमाज़ी आकर नमाज़ी बन गए मुल्तान में सुन्नतों से सब के चेहरे जगमगाएंगे यहां इंशाअल्लाह मुस्तफ़ा के फ़ैज़ से मुल्तान में सुन्नतों की तरबियत के खूब मदनी काफिले चार सू होंगे रवाना खैर से मुल्तान में मदनी इनामात की धूमें मचाते जाएंगे सुन्नतों की तरबियत के काफिले मुल्तान में फ़ज़्ले रब से अहले हक का बादे हज सब से बड़ा इज्तिमाए पाक है ये खैर से मुल्तान में बख्श दे या रब! सभी को और उन को बिलखुसूस आए हैं करने सफर जो दूर से मुल्तान में काश! इश्के मुस्तफ़ा में या खुदा तड़पा करूं आंख तेरे खौफ से रोती रहे मुल्तान में रुकने आलम और बहाउद्दीन के सदके खुदा हो कबूल उस की दुआ जो भी करे मुल्तान में इंशाअल्लाह हर दुआ अत्तार अब मकबूल है हैं खुदा की रहमतों के दर खुले मुल्तान में