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तेरा शुक्रिया ताजदारे मदीना

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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तेरा शुक्रिया ताजदारे मदीना मुझे फिर दिखाया दयारे मदीना हसीं पत्ता पत्ता हसीं डाली डाली हसीं सब का सब लाला ज़ारे मदीना ख़ुदा! दिल से दुनिया की उल्फ़त मिटा दे तू दे उल्फ़ते ताजदारे मदीना भुला दे चमन के नज़ारों को बेशक है ऐसा हसीं रेगज़ारे मदीना मैं रिज़वाने जन्नत को तोहफ़े में दूँगा अता कीजे चंद ख़ारे मदीना मदीने में घर सब के ग़मख़्वार का है जभी तो सभी हैं निसारे मदीना तुझे वास्ता या ख़ुदा मुस्तफ़ा का बना दे मुझे दिल फ़िगारे मदीना अगर हो यक़ीन ज़ख़्म भर जाएंगे सब लगा लो ज़रा सा ग़ुबारे मदीना तड़पते हैं जो हिज्रो फ़ुर्क़त में आक़ा दिखा दो उन्हें भी बहारे मदीना इधर से उधर क्यों भटकता फिरूं मैं मुक़द्दर से हूँ रेज़ा ख़्वारे मदीना मदीने में मरने का मुझ को शरफ़ दो करम या नबी ताजदारे मदीना दो अत्तार को अश्कबार आंख आक़ा पये ग़ौसे शहियारे मदीना