तेरे दर से है मंगतों का गुज़ारा या शह-ए-बग़दाद
ये सुन कर मैं ने भी दामन पसारा या शह-ए-बग़दाद
मेरी किस्मत का चमका दो सितारा या शह-ए-बग़दाद
दिखा दो अपना चेहरा प्यारा प्यारा या शह-ए-बग़दाद
इजाज़त दो कि मैं बग़दाद हाज़िर हो के फिर कर लूं
तुम्हारे नीले गुंबद का नज़ारा या शह-ए-बग़दाद
ग़म-ए-शाह-ए-मदीना मुझ को तुम ऐसा अता कर दो
जिगर टुकड़े हो दिल भी पारा पारा या शह-ए-बग़दाद
मदीने का बना दो तुम मुझे कुछ ऐसा दीवाना
फिरूं दीवानगी में मारा मारा या शह-ए-बग़दाद
ख़ुदा के ख़ौफ़ से रोए नबी के इश्क़ में रोए
अता कर दो वो चश्म-ए-तर ख़ुदारा या शह-ए-बग़दाद
गुनाहों के मर्ज़ ने कर दिया है नीम जाँ मुझ को
तुम्हें आ के करो अब कोई चारा या शह-ए-बग़दाद
मुझे अच्छा बना दो मुरशिदी बे-शक यक़ीनन हैं
मेरे हालात तुम पर आशकारा या शह-ए-बग़दाद
सुधारो मुरशिदी लिल्लाह अपने ढीट बंदे को
ना जाने तुम ने कितनों को सुधारा या शह-ए-बग़दाद
हुई जाती है उजड़ अब मेरी उम्मीद की खेती
भर्न बरसा दो रहमत की ख़ुदारा या शह-ए-बग़दाद
करम मीरां अब्र से उजड़े गुलिस्तां में बहार आए
ख़िज़ां का रुख़ फिरा दो अब ख़ुदारा या शह-ए-बग़दाद
शाह! ख़ैरात लेने को सलातीन-ए-ज़माना ने
तेरे दरबार में दामन पसारा या शह-ए-बग़दाद
गरजते बादलों का शोर चलती आंधियों का ज़ोर
लर्ज़ता है कलेजा दो सहारा या शह-ए-बग़दाद
बचालो दुश्मनों के वार से या ग़ौस-ए-जिलानी
बड़ी उम्मीद से तुम को पुकारा या शह-ए-बग़दाद
वसीला चार यारों का ख़ुदा से बख्शवा दीजे
करम फरमाइए मुझ पर ख़ुदारा या शह-ए-बग़दाद
अगरचह लाख पापी है मगर अत्तार किस का है?
तुम्हारा है तुम्हारा है तुम्हारा या शह-ए-बग़दाद