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ठंडी ठंडी हवा मदीने की

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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ठंडी ठंडी हवा मदीने की महकी महकी फ़ज़ा मदीने की आरज़ू है ख़ुदा मदीने की मुझ को गलियां दिखा मदीने की दिन है कैसा मुनव्वर-ओ-रोशन रात रौ़नक़ फ़ज़ा मदीने की छांव तो हर जगह की ठंडी पर धूप भी वाह वाह मदीने की कैफ़-आवर है मौसम-ए-सरमा गर्मियां मरहबा मदीने की फूल तो फूल ख़ार भी दिलकश पत्तियां दिलरुबा मदीने की है चमन तो हसीन कांटों की झाड़ियां ख़ुशनुमा मदीने की है पहाड़ों पे नूर की चादर वादियां मरहबा मदीने की सब्ज़ गुम्बद का हुस्न क्या कहना जालियां दिलकुशा मदीने की कैफ़-ओ-मस्ती भरा समां है वां कैफ़-आवर फ़ज़ा मदीने की हर घड़ी रहमतें बरसती हैं है मुबारक हवा मदीने की ज़र्रा ज़र्रा वहां का नूरानी है मुनव्वर फ़ज़ा मदीने की ज़ुल्मत-ए-शब डराएगी क्योंकर! हर तरफ़ है ज़िया मदीने की ग़मज़दा आंख खोल के देखो छा गई है घटा मदीने की क्यों हो मायूस ऐ मरीज़-ए-उमम ले लो ख़ाक-ए-शफ़ा मदीने की झोलियां भर के तू भी लाएगा राह ले ऐ गदा मदीने की मेरे मुरझाए दिल को झोंका दे आ के बाद-ए-सबा मदीने की