सवाल: दुआ में यह अशआर पढ़ना कैसा है?
या ख़ुदा! अपने न आईन-ए-करम को भूल जा
हम तुझे भूले हैं लेकिन तू न हम को भूल जा
है दुआ-ए-बिस्मिल-ए-नीम जां, कि मेरी ख़ताओं को भूल जा
है मुझे तो तेरा ही आसरा, तू ग़फ़ूर है तू रहीम है
जवाब: भूलना के असल मानी याद न रहना है। तो अगर क़ाइल की यही मुराद है तब तो कुफ़्र है और कहने वाले ने लफ़्ज़ भूलना को छोड़ना के मानी में इस्तेमाल किया तो कुफ़्र नहीं।