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Tu Ne Mujh Ko Hajj Pe Bulaya Ya Allah Meri Jholi Bhar De

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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तू ने मुझ को हज्ज पे बुलाया या अल्लाह मेरी झोली भर दे गर्द-ए-काबा ख़ूब फिराया या अल्लाह मेरी झोली भर दे मैदान-ए-अरफ़ात दिखाया या अल्लाह मेरी झोली भर दे बख़्श दे हर हाजी को ख़ुदाया या अल्लाह मेरी झोली भर दे बह कौसर-ओ-बीर-ए-ज़मज़म कर दे करम ऐ रब्ब-ए-अकरम हश्र की प्यास से मुझे बचाना या अल्लाह मेरी झोली भर दे मौला मुझ को नेक बना दे अपनी उल्फ़त दिल में बसा दे बह सफ़ा और बह मरवा या अल्लाह मेरी झोली भर दे या अल्लाह या रहमान या हन्नान या मन्नान बख़्श दे बख़्शे हुओं का सदक़ा या अल्लाह मेरी झोली भर दे वास्ता नबियों के सरवर का वास्ता सिद्दीक़ और उमर का वास्ता उस्मान-ओ-हैदर का या अल्लाह मेरी झोली भर दे नार-ए-जहन्नुम से तू बचाना ख़ुल्द-ए-बरीं में मुझ को बसाना या रब उड़ाए शाह-ए-मदीना या अल्लाह मेरी झोली भर दे साइल हूँ मैं तेरी वला का फेर दे रुख़ हर रंज-ओ-बला का वास्ता शाह-ए-कर्ब-ओ-बला का या अल्लाह मेरी झोली भर दे जिस दम सू-ए-तैबा सफ़र हो आँखें तर हों फटता जिगर हो और अता हो सोज़िश-ए-सीना या अल्लाह मेरी झोली भर दे सामने जब हो गुम्बद-ए-ख़ज़रा क़ल्ब-ओ-जिगर हों पारा पारा बह निकलें अश्कों का धारा या अल्लाह मेरी झोली भर दे शाह-ए-मदीना की उल्फ़त दे सोज़ दे और दर्द-ओ-ऱिक्क़त दे इश्क़-ए-नबी में ख़ूब रुलाना या अल्लाह मेरी झोली भर दे मैं हूँ बन्दा तू है मौला तू है क़ादिर मैं नाकारा मैं मँगता तू देने वाला या अल्लाह मेरी झोली भर दे सोज़-ए-उवैस-ओ-बिलाल ख़ुदा दे ग़ौस का सदक़ा मुझ को बना दे शाह-ए-मदीना का दीवाना या अल्लाह मेरी झोली भर दे हाज़िर दर हूँ मैं दुखियारा या रब! तेरा ही है सहारा रंज-ओ-अलम ने मुझ को मारा या अल्लाह मेरी झोली भर दे है तेरा फ़रमान उदुओनी है यह दुआ हो क़ब्र न सूनी जल्वा-ए-यार से इस को बसाना या अल्लाह मेरी झोली भर दे दे हुस्न-ए-अख़लाक़ की दौलत कर दे अता इख़लास की नेमत मुझ को ख़ज़ाना दे तक़वा का या अल्लाह मेरी झोली भर दे बख़्श दे मेरी सारी ख़ताएँ खोल दे मुझ पर अपनी अताएँ बरसा दे रहमत की बरखा या अल्लाह मेरी झोली भर दे दावत-ए-इस्लामी की क़य्यूम एक एक घर में मच जाए धूम इस पे फ़िदा हो बच्चा बच्चा या अल्लाह मेरी झोली भर दे यूँ मेरा दुनिया से सफ़र हो उन की चौखट पे मेरा सर हो पेश-ए-नज़र हो उन का जलवा या अल्लाह मेरी झोली भर दे ताज ओ तख़्त ओ हुकूमत मत दे कसरत-ए-माल ओ दौलत मत दे अपनी रज़ा के दे दे मुज़दे या अल्लाह मेरी झोली भर दे जन्नत में आक़ा का पड़ोसी बन जाए अत्तार इलाही मौला अज़ पए क़ुत्ब-ए-मदीना या अल्लाह मेरी झोली भर दे