तुम्हें ने तो किया हम को मुसलमान या रसूल अल्लाह
तुम्हें तो हो हमारा दीन-ओ-ईमान या रसूल अल्लाह
न भूले और न भूलोगे क़यामत तक ग़ुलामों को
न क्यों हों अहले-सुन्नत तुम पे क़ुर्बान या रसूल अल्लाह
फ़क़त ये आरज़ू है नज़अ में मरक़द में महशर में
कहीं हम से न छूटे तेरा दामन या रसूल अल्लाह
लिवा-उल-हम्द के नीचे बने मौला क़यामत में
मेरा हर रोंगटा तेरा सना ख़्वाँ या रसूल अल्लाह
तेरे हुस्न-ओ-मलाहत पर दो आलम क्यों न हों क़ुर्बान
ख़ुदा-ए-पाक है तेरा सना ख़्वाँ या रसूल अल्लाह
मकान-ओ-लामाकान हूर-ओ-मलक अर्श-ओ-फ़लक कुर्सी
तुम्हारे ही लिए ये सब है सामाँ या रसूल अल्लाह