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या ख़ुदा हर दम निगाह में उन का काशाना रहे

Written by Maulana Muhammad Jamil-ur-Rehman Razvi

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या ख़ुदा हर दम निगाह में उन का काशाना रहे दोनों आलम में ख्याले रूए जानाना रहे ऐ अरब के चाँद तेरे ज़र्रे का ज़र्रा हूँ मैं ता अबद पुरनूर मेरे दिल का काशाना रहे क्यों मुअत्तर हो न खुशबू से दो आलम का दिमाग़ पंज-ए-क़ुदरत तेरे गेसू का जब शाना रहे जिस मकाँ की अपने पाए पाक से इज़्ज़त बढ़ाएं क्यों न सब अमराज़ का वो घर शफाखाना रहे ज़िंदगी में बादे मुर्दन् उन के नामे पाक से या ख़ुदा आबाद मेरे दिल का वीराना रहे ऐने ईमाँ है यही और है हर एक मोमिन पे फ़र्ज़ उन के नामे पाक का दुनिया में मस्ताना रहे