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Yaqeenan Manba-e-Khauf-e-Khuda Siddique-e-Akbar Hain

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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यकीनन मन्बा-ए-ख़ौफ़-ए-ख़ुदा सिद्दीक़-ए-अकबर हैं हक़ीक़ी आशिक़-ए-ख़ैरुल-वरा सिद्दीक़-ए-अकबर हैं बिला शक पैकर-ए-सब्र-ओ-रज़ा सिद्दीक़-ए-अकबर हैं यकीनन मख़ज़न-ए-सिदक़-ओ-वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर हैं निहायत मुत्तक़ी-ओ-पारसा सिद्दीक़-ए-अकबर हैं तक़ी हैं बल्कि शाह-ए-अतक़िया सिद्दीक़-ए-अकबर हैं जो यार-ए-ग़ार-ए-महबूब-ए-ख़ुदा सिद्दीक़-ए-अकबर हैं वही यार-ए-मज़ार-ए-मुस्तफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर हैं तबीब-ए-हर मरीज़-ए-लादवा सिद्दीक़-ए-अकबर हैं ग़रीबों बे-कसों का आसरा सिद्दीक़-ए-अकबर हैं अमीरुल मोमिनीन हैं आप इमामुल मुस्लिमीन हैं आप नबी ने जन्नती जिन को कहा सिद्दीक़-ए-अकबर हैं सभी असहाब से बढ़ कर मुक़र्रब ज़ात है उन की रफ़ीक़-ए-सरवर-ए-अर्ज़-ओ-समा सिद्दीक़-ए-अकबर हैं उमर से भी वो अफ़ज़ल हैं वो उस्मान से भी हैं आला यकीनन पेशवाए मुर्तज़ा सिद्दीक़-ए-अकबर हैं इमाम-ए-अहमद-ओ-मालिक, इमाम-ए-अबू हनीफ़ा और इमाम-ए-शाफ़ई के पेशवा सिद्दीक़-ए-अकबर हैं तमाम औलिया-ए-अल्लाह के सरदार हैं जो उस हमारे गौस के भी पेशवा सिद्दीक़-ए-अकबर हैं सभी उलमा-ए-उम्मत के, इमाम-ओ-पेशवा हैं आप बिला-शक पेशवाए असफ़िया सिद्दीक़-ए-अकबर हैं ख़ुदाए पाक की रहमत से इंसानों में हर एक से फ़ज़ूँ तर बा'द अज़ कुल्ल-ए-अम्बिया सिद्दीक़-ए-अकबर हैं हलाकत खेज़ तुग़्यानी हो या हों मौजें तूफ़ानी न डूबै अपना बेड़ा सिद्दीक़-ए-अकबर हैं भटक सकते नहीं हम अपनी मंज़िल ठोकरों में है नबी का है करम और रहनुमा सिद्दीक़-ए-अकबर हैं गुनाहों के मरज़ ने नीम जां है कर दिया मुझ को तबीब अब बस मेरै तो आप या सिद्दीक़-ए-अकबर हैं न घबराओ गुनहगारो तुम्हारे हश्र में हामी मुहिब्बे शाफ़ि-ए-रोज़े जज़ा सिद्दीक़-ए-अकबर हैं न डर अत्तार आफ़त से ख़ुदा की ख़ास रहमत से नबी वाली तेरे, मुश्किलकुशा सिद्दीक़-ए-अकबर हैं