ज़र्रे ज़र्रे पे छाया हुआ नूर है, मेरे मीठे मदीने की क्या बात है
नूर से सब फ़ज़ा इस की मअमूर है, मेरे मीठे मदीने की क्या बात है
नूर फूलों में है नूर कलियों में है, नूर बाज़ार में नूर गलियों में है
दश्त-ओ-कोहसार पर नूर ही नूर है, मेरे मीठे मदीने की क्या बात है
हर तरफ़ रहमतों की छाई घटा, महकी महकी है क्या खूब मदनी फ़ज़ा
ज़र्रे ज़र्रे पे क़ुर्बान यहाँ तौर है, मेरे मीठे मदीने की क्या बात है
क्या यहाँ दश्त-ए-तैबा की हूँ खूबियाँ, फूल तो फूल काँटे भी दिलकश यहाँ
पत्ते पत्ते पे छाया हुआ नूर है, मेरे मीठे मदीने की क्या बात है
कैफ़-ओ-मस्ती में डूबे हुए रात दिन, भीनी खुशबू से महके हुए रात दिन
जिस को देखो यहाँ आके मसरूर है, मेरे मीठे मदीने की क्या बात है
बाग़-ए-तैबा में रहती है हर दम बहार, आके देखो यहाँ का समाँ खुशगवार
सब फ़ज़ा इस की खुशबू से भरपूर है, मेरे मीठे मदीने की क्या बात है
ग़म ज़दा जो भी दरबार में आ गया, शाह की वह निगाह-ए-करम पा गया
सारा रंज-ओ-अलम इस का काफ़ूर है, मेरे मीठे मदीने की क्या बात है
देखो तैबा को कैसी फ़ज़ीलत मिली, क़ब्र-ए-अनवर इसी में बनाई गई
गुम्बद-ए-सब्ज़ हर आँख का नूर है, मेरे मीठे मदीने की क्या बात है
सब्ज़ गुम्बद के जलवों पे क़ुर्बान जाँ, बल्कि क़ुर्बान है हुस्न-ए-कोन-ओ-मकाँ
हर मीनार पे छाया हुआ नूर है, मेरे मीठे मदीने की क्या बात है
ख़ाक-ए-तैबा में रखी है रब ने शफ़ा, सारी बीमारियों की है इस में दवा
इस की बरकत से हर एक मर्ज़ दूर है, मेरे मीठे मदीने की क्या बात है
आस मुझ को तुम्हारे करम की शहा, भीक दे दो मुझे अपने ग़म की शहा
कह दो आक़ा! तरी अर्ज़ मंज़ूर है, मेरे मीठे मदीने की क्या बात है
फिर करम इस पे सरकार का हो गया, बख़्त बेदार अत्तार का हो गया
रूबरू रौज़ा-ए-पाक का नूर है, मेरे मीठे मदीने की क्या बात है