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Aah! Shah-e-Bahr-o-Bar! Main Madina Chhor Aaya

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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(काश! मेरे भी यह जज़्बात होते, यह सिर्फ़ आशिक़-ए-रसूल की मदीने से जुदाई के जज़्बात की तरजुमानी है) आह! शाह-ए-बहर ओ बर! मैं मदीना छोड़ आया कोह-ए-ग़म पड़ा सर पर, मैं मदीना छोड़ आया आह! मस्जिद-ए-नबवी, हाय गुम्बद-ए-ख़ज़रा आह! रौज़ा-ए-अनवर, मैं मदीना छोड़ आया ग़म के छाए बादल, दिल में मच गई हल चल आह! ऐ मरे यावर! मैं मदीना छोड़ आया जब चला था तैयबा को, थी ख़ुशी मरे दिल को आह! अब है दिल-ए-मुज़्तर, मैं मदीना छोड़ आया दिल में बेक़रारी है और गिरया तारी है बह रही है चश्म-ए-तर, मैं मदीना छोड़ आया छुप गया निगाहों से, आह! सब मदीने का दिलकश ओ हसीं मंज़र, मैं मदीना छोड़ आया क़ल्ब पारा पारा है, हिज्र-ए-शाह ने मारा है आह! मेरे चार-ए-गर! मैं मदीना छोड़ आया अब ग़म-ए-मदीना से, चाक चाक सीना है क्यों कहूँ न रो रो कर, मैं मदीना छोड़ आया लुत्फ़ जो है तैयबा में वो कहाँ वतन में है क्या करूँगा जा कर घर, मैं मदीना छोड़ आया लौट कर न मैं आता, काश! जान दे देता गिर के ख़ाक-ए-तैयबा पर, मैं मदीना छोड़ आया आह! दिन मदीने के, जल्द जल्द गुज़रे थे हाए जल्द छूटा दर, मैं मदीना छोड़ आया दिन को भी सुरूर आता, शब को भी ज़रूर आता क्या फ़ज़ा थी कैफ़ आवर, मैं मदीना छोड़ आया था वहाँ समां नूरी, रंज ओ ग़म से थी दूरी आह! नूर के पैकर! मैं मदीना छोड़ आया वक़्त-ए-हिज्र जब आया, फूट फूट कर रोया दर्द नाक था मंज़र, मैं मदीना छोड़ आया हिज्र का है सदमा और सीना ओ जिगर मेरे रख के क़ल्ब पर पत्थर, मैं मदीना छोड़ आया हिज्र के मैं सदमों से, चूर चूर ज़ख्मों से चल रहा था रो रो कर, मैं मदीना छोड़ आया जब मदीना छूटा था कोह-ए-ग़म का टूटा था जान ओ दिल लिए मुज़्तर, मैं मदीना छोड़ आया सब्ज़ गुंबद और मीनार, आह! छूट गए सरकार फिर बुलाइए सरवर, मैं मदीना छोड़ आया था ग़म-ए-मदीना में, फ़ुर्क़त-ए-मदीना में दिल मेरा बहुत मुज़्तर, मैं मदीना छोड़ आया मेरे हामी ओ हमदम! दूर हूँ जहाँ के ग़म दे दो अपना ग़म सरवर! मैं मदीना छोड़ आया दिल में है परेशानी, हो करम ऐ सुल्तानी आओ ख़्वाब में सरवर! मैं मदीना छोड़ आया दिल की है अजब हालत, सदमा ओ ग़म-ए-फ़ुर्क़त अल-फ़िराक़ ऐ सरवर! मैं मदीना छोड़ आया चल दिया सफीना है छूट गया मदीना है हाए! क्या करूँ सरवर मैं मदीना छोड़ आया ग़म की हो गया तस्वीर, आह! हिज्र है तक़दीर चुप हुआ हूँ रो रो कर! मैं मदीना छोड़ आया दूर हो गया सरकार! आह! ग़मज़दा अत्तार जल्द आऊँ फिर दर पर, मैं मदीना छोड़ आया