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Aaj Hain Har Jagah Aashiqan-e-Rasool

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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আজ হ্যায় হার জাগাহ আশিকে-এ-রাসূল, মাহভে-এ-নাত-ও-সানা আশিকে-এ-রাসূল জশনে-এ-মিলাদ কা সাব রাহে হ্যায় মানা, বান্দাগানে-এ-খোদা আশিকে-এ-রাসূল জশনে-এ-মিলাদ সে ইশ্ক হ্যায় পেয়ার হ্যায়, হ্যায় মানাতে সদা আশিকে-এ-রাসূল মাহে-এ-মিলাদ মে খুব লেহরাইয়ে, ঘার পে ঝান্ডা হারা আশিকে-এ-রাসূল আমাদে-এ-মুস্তফা মারহাবা মারহাবা, সাব লাগাও সদা আশিকে-এ-রাসূল সিখনে সুন্নাতাইন, মাসজিদ আও চালেঁ, লায়ে হ্যায় কাফিলা আশিকে-এ-রাসূল ইয়াদ রাখনা কাভি ছোরনা মাত কাভি, দামানে-এ-মুস্তফা আশিকে-এ-রাসূল রাহমাতে-এ-কিবারিয়া তুম পে হো দাঈমান, হ্যায় হামারি দুয়া আশিকে-এ-রাসূল তুম পে ফযলে-এ-খোদা, রাহমাতে-এ-মুস্তফা, হো বারোজে-এ-জাজা আশিকে-এ-রাসূল কাশ! দুনিয়া মে তুম দো বা-ফযলে-এ-খোদা, দ্বীন কা ডাঙ্কা বাজা আশিকে-এ-রাসূল তুম পে হো কাবর মে হার জাগাহ হাশর মে, সায়া-এ-মুস্তফা আশিকে-এ-রাসূল বে-নামাযি রাহেন কুছ না রোজে রাখেন, উন কো কিস নে কাহা? আশিকে-এ-রাসূল আলেমোঁ পার হাসেন, ফাবতিয়ান ভি কাসেন, উন কো কিস নে কাহা? আশিকে-এ-রাসূল जो के गाने सुनें, फिल्म बीनी करें उन को किस ने कहा? आशिक़ान-ए-रसूल बद निगाही करें, बद कलामी करें उन को किस ने कहा? आशिक़ान-ए-रसूल खाएं रिज़्क़-ए-हराम, ऐसे हैं बद लगाम उन को किस ने कहा? आशिक़ान-ए-रसूल अहद तोड़ा करें, झूठ बोला करें उन को किस ने कहा? आशिक़ान-ए-रसूल जो सताते रहें दिल दुखाते रहें उन को किस ने कहा? आशिक़ान-ए-रसूल चुग़लियों तोहमतों, में जो मशग़ूल हों उन को किस ने कहा? आशिक़ान-ए-रसूल गालियां जो बकें ऐब दरयां करें उन को किस ने कहा? आशिक़ान-ए-रसूल दाढ़ियां जो मुंडाएं करें ग़ीबतें उन को किस ने कहा? आशिक़ान-ए-रसूल काश! अत्तार का तैबा में खात्मा हो करो ये दुआ आशिक़ान-ए-रसूल बुख़्ल की तारीफ़ हुवा मलकतु इमसाकिल माली हैसु यजीबु बज़लु-हू बि हुक्मिश शरई अविल मुरुअति यानी जिस चीज़ का ख़र्च करना शरअन या मुरुवतन ज़रूरी हो वहां ख़र्च न करना। (हदीक़ा नदिया शरह तरीक़ा मुहम्मदिया ज २ स २७) ग़ीबत की तारीफ़ किसी (ज़िंदा या मुर्दा) शख़्स के पोशीदा ऐब को (जिस का वह दूसरों के सामने ज़ाहिर होना पसंद न करता हो) उस की बुराई करने के तौर पर ज़िक्र करना। (बहार-ए-शरीअत हिस्सा ९ स १७ मकतबतुल मदीना कराची) नौहा की तारीफ़ मय्यत के औसाफ़ मुबालग़ा के साथ (यानी मय्यत की बढ़ा चढ़ा कर तारीफ़) बयान कर के आवाज़ के साथ रोना। (बहार-ए-शरीअत ज अव्वल स ८५७ मकतबतुल मदीना कराची)