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Allah! Mujhe Hafiz-e-Quran Bana De

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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अल्लाह! मुझे हाफ़िज़-ए-क़ुरआन बना दे (हिफ़्ज़-ओ-नाज़राह के तलबा की मुनाजात) अल्लाह! मुझे हाफ़िज़-ए-क़ुरआन बना दे क़ुरआन के अहकाम पे भी मुझको चला दे हो जाया करे याद सबक़ जल्द इलाही! मौला तू मेरा हाफ़िज़-ए-मज़बूत बना दे सुस्ती हो मेरी दूर उठूँ जल्द सवेरे तू मदरसे में दिल मेरा अल्लाह! लगा दे हो मदरसे का मुझसे न नुक़सान कभी भी अल्लाह! यहाँ के मुझे आदाब सिखा दे छुट्टी न करूँ भूल के भी मदरसे की मैं औक़ात का भी मुझको पाबंद बना दे उस्ताद हूँ मौजूद या बाहर कहीं मसरूफ़ आदत तू मेरी शोर मचाने की मिटा दे ख़सलत हो मेरी दूर शरारत की इलाही! संजीदा बना दे मुझे संजीदा बना दे उस्ताद की करता रहूँ हर दम में इताअत माँ बाप की इज़्ज़त की भी तौफ़ीक़ ख़ुदा दे कपड़े में रखूँ साफ़ तू दिल को मेरे कर साफ़ मौला तू मदीना मेरे सीने को बना दे फ़िल्मों से ड्रामों से दे नफ़रत तू इलाही बस शौक़ मुझे नात-ओ-तिलावत का ख़ुदा दे मैं साथ जमात के पढ़ूँ सारी नमाज़ें अल्लाह! इबादत में मेरे दिल को लगा दे पढ़ता रहूँ कसरत से दुरूद उन पे सदा मैं और ज़िक्र का भी शौक़ पये ग़ौस रज़ा दे हर काम शरीयत के मुताबिक करूँ काश! या रब तू मुबल्लिग़ मुझे सुन्नत का बना दे मैं झूठ न बोलूँ कभी गाली न निकालूँ अल्लाह! मर्ज़ से तू गुनाहों के शिफ़ा दे मैं फ़ालतू बातों से रहूँ दूर हमेशा चुप रहने का अल्लाह! सलीक़ा तू सिखा दे अख़लाक़ हों अच्छे मेरा किरदार हो सुथरा महबूब का सदक़ा तू मुझे नेक बना दे उस्ताद हूँ, माँ बाप हूँ, अत्तार भी हो साथ यूँ हज को चलें और मदीना भी दिखा दे फ़रमाने मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही वसल्लम है: जिसने मुझ पर रोज़े जुमा दो सौ बार दुरूदे पाक पढ़ा उसके दो सौ साल के गुनाह माफ़ होंगे। (कनज़ुल उम्माल ज 1 स 256 हदीस 2238)