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फ़ज्र का वक़्त हो गया

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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फ़ज्र का वक़्त हो गया उठो! ऐ ग़ुलामान-ए-मुस्तफ़ा उठो! जागो जागो ऐ भाइयो, बहनो! छोड़ दो अब तो बिस्तर उठो! तुम को हज्ज की ख़ुदा सआदत दे, जलवा देखो मदीने का उठो! उठो ज़िक्र-ए-ख़ुदा करो उठ कर! दिल से लो नाम-ए-मुस्तफ़ा उठो! फ़ज्र की हो चुकें अज़ानें वक़्त हो गया है नमाज़ का उठो! भाइयो! उठ कर अब वज़ू कर लो! और चलो ख़ाना-ए-ख़ुदा उठो! नींद से तो नमाज़ बेहतर है अब न मुतलक़ भी लेटना उठो! उठ चुके अब खड़े भी हो जाओ! आँख शैतान न दे लगा उठो! जागो जागो नमाज़-ए-ग़फ़लत से कर न बैठो कहीं क़ज़ा उठो! अब 'जो सोये नमाज़ खोये' वक़्त सोने का अब नहीं उठो! याद रखो! नमाज़ गर छोड़ी क़ब्र में पाओगे सज़ा उठो! बे-नमाज़ी फंसेगा महशर में होगा नाराज़ किबरिया उठो! मैं 'सदा-ए-मदीना' देता हूँ तुम को तय्यबा का वास्ता उठो! मैं भिखारी नहीं हूँ दर-ए-दर का मैं हूँ सरकार का गदा उठो! मुझ को देना न पाई पैसा तुम! मैं हूँ तालिब-ए-सवाब उठो! तुम को देता है ये दुआ अत्तार फ़ज़्ल तुम पर करे ख़ुदा उठो!