फ़ज्र का वक़्त हो गया उठो! ऐ ग़ुलामान-ए-मुस्तफ़ा उठो!
जागो जागो ऐ भाइयो, बहनो! छोड़ दो अब तो बिस्तर उठो!
तुम को हज्ज की ख़ुदा सआदत दे, जलवा देखो मदीने का उठो!
उठो ज़िक्र-ए-ख़ुदा करो उठ कर! दिल से लो नाम-ए-मुस्तफ़ा उठो!
फ़ज्र की हो चुकें अज़ानें वक़्त हो गया है नमाज़ का उठो!
भाइयो! उठ कर अब वज़ू कर लो! और चलो ख़ाना-ए-ख़ुदा उठो!
नींद से तो नमाज़ बेहतर है अब न मुतलक़ भी लेटना उठो!
उठ चुके अब खड़े भी हो जाओ! आँख शैतान न दे लगा उठो!
जागो जागो नमाज़-ए-ग़फ़लत से कर न बैठो कहीं क़ज़ा उठो!
अब 'जो सोये नमाज़ खोये' वक़्त सोने का अब नहीं उठो!
याद रखो! नमाज़ गर छोड़ी क़ब्र में पाओगे सज़ा उठो!
बे-नमाज़ी फंसेगा महशर में होगा नाराज़ किबरिया उठो!
मैं 'सदा-ए-मदीना' देता हूँ तुम को तय्यबा का वास्ता उठो!
मैं भिखारी नहीं हूँ दर-ए-दर का मैं हूँ सरकार का गदा उठो!
मुझ को देना न पाई पैसा तुम! मैं हूँ तालिब-ए-सवाब उठो!
तुम को देता है ये दुआ अत्तार फ़ज़्ल तुम पर करे ख़ुदा उठो!