हज़रत सैय्यदना अबू क़तादा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के हक़ में हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वा आलिही वसल्लम ने ये दुआ फ़रमाई: अफलहा वजहुक अल्लाहुम्मा बारिक लहु फी शअरिही व बशरीही यानी फ़लाह वाला हो जाए तेरा चेहरा, या अल्लाह! इसके बाल और इसकी खाल में बरकत दे। सैय्यदना अबू क़तादा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने सत्तर बरस की उम्र पा कर वफ़ात पाई मगर उनका एक बाल भी सफ़ेद नहीं हुआ था न बदन में झुर्रियां पड़ी थीं, चेहरे पर जवानी ऐसी रौनक़ थी कि गोया अभी पंद्रह बरस के जवान हैं। (अश-शिफ़ा, जिल्द 1, सफ़हा 327)